रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार शाम छत्तीसगढ़ हर्बल्स दीवाली मेला का शुभारंभ किया। इस दौरान सीएम ने इल्कट्रिक चाक पर अपने हाथ आजमाए। उन्होंने दिया बनाकर परंपरागत व्यवसायियों को प्रोत्साहित किया।

शुभारंभ के अवसर पर सीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी-वनवासी परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने में लघु वनोपजों के उत्पाद की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस पर हमें गर्व है कि लघु वनोपज संघ वन विभाग के सतत् प्रयासों से राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्र और वनांचल के निवासियों का विकास हो रहा है। सीएम ने मेले में लगाए गए आयुष स्टॉल और घरेलू उत्पाद स्टॉल, कोदो-कुटकी उत्पाद स्टॉल, आयुर्वेदिक चिकित्सालय, गढ़कलेवा खाद्य उत्पाद स्टॉल और हथकरघा एवं माटी कला बोर्ड तथा शबरी एम्पोरियम आदि स्टॉल का अवलोकन कर उन्हें प्रोत्साहित किया।

मेले में तिखुर से बनी मिठाइयों की महक

मुख्यमंत्री ने जिला यूनियन धमतरी द्वारा वनोपज ‘तिखुर’ से बने उत्पाद जलेबी, बर्फी और हलवा का भी स्वाद लिया और इसे छत्तीसगढ़ के स्वादिष्ट पकवान बताते हुए सराहना की। छत्तीसगढ़ के तिखुर से बने पकवान का प्रचार-प्रसार के लिए नगर निगम से भी दुकान आवंटन के लिए आवश्यक पहल करने की बात कही। शहर के पंडरी स्थित छत्तीसगढ़ हाट परिसर में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों में छत्तीसगढ़ हर्बल्स के 130 से अधिक उत्पाद 15 प्रतिशत की छूट पर उपलब्ध है।

छत्तीसगढ़ हर्बल्स से परिचित कराना उद्देश्य

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि छत्तीसगढ़ हर्बल्स दीवाली मेला का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के निवासियों को उनके अपने ब्रांड छत्तीसगढ़ हर्बल्स से परिचित कराना है। उन्हें उस स्नेह एवं लगन की शुद्धता से भी परिचित कराना है, जो स्व-सहायता समूह की महिलाएं छत्तीसगढ़ हर्बल्स के इन उत्पादों में डालती हैं। मेले में इस दीवाली खरीदा गया हर छत्तीसगढ़ हर्बल्स उत्पाद किसी आदिवासी अथवा वनवासी परिवार का जीवन उज्जवल करेगा।

छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों, झिटकू-मिटकी कला, हैण्डलूम उत्पाद के स्टॉल भी शामिल

मेले में छत्तीसगढ़ हर्बल्स के आयुर्वेदिक उत्पाद, खाद्य उत्पाद और विभिन्न प्रकार के घरेलू उत्पाद की खरीदी कर सकते हैं। यह उत्पाद 6 हजार से ज्यादा स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए हैं, जो दुर्गम क्षेत्रों में स्थित 50 से ज्यादा वनधन विकास केन्द्रों में कार्यरत हैं। इसके अलावा मेले में 11 अन्य स्व-सहायता समूहों और कृषक समितियों के 60 से अधिक उत्पाद भी प्रदर्शनी में शामिल हैं। मेला में लोगों की सेहत का ध्यान रखने के लिए परंपरागत वैद्य भी हैं। मेले में अन्य आकर्षण बांस शिल्प, छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध झिटकू-मिटकी कला और हैण्डलूम उत्पाद के स्टॉल्स भी हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद वहां गढ़कलेवा के स्टॉल में ले सकते हैं।