रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री फिल्में समाज में जागरूकता फैलाने और लोगों को सकारात्मक दिशा देने की अद्भुत क्षमता रखती हैं। उन्होंने कहा कि सिनेमा केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सरोकारों और जनहित के मुद्दों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रभावी माध्यम भी है। यही कारण है कि फिल्मों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
भारतीय सिनेमा की ऐतिहासिक भूमिका
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि डॉक्यूमेंट्री फिल्में और अन्य फिल्म माध्यम लंबे समय से समाज में जागरूकता का कार्य करते रहे हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी फिल्मों और सांस्कृतिक माध्यमों ने लोगों को प्रेरित करने में अहम योगदान दिया था। आज डिजिटल युग में भी इनकी प्रासंगिकता कम नहीं हुई है बल्कि दर्शकों तक पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़े हैं।
बस्तर की सकारात्मक पहचान को बढ़ावा देने की जरूरत
राज्यपाल ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री फिल्में बस्तर जैसे क्षेत्रों की सकारात्मक तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत कर सकती हैं। उन्होंने फिल्म निर्माताओं को बस्तर की संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन पर आधारित रचनात्मक परियोजनाएं विकसित करने का सुझाव दिया। इससे क्षेत्र की पहचान मजबूत होगी और नई पीढ़ी को अपनी विरासत के बारे में जानकारी मिलेगी।
लोककला और परंपराओं के संरक्षण का माध्यम
उन्होंने कहा कि डॉक्यूमेंट्री फिल्में लोककलाओं और जनजातीय परंपराओं को संरक्षित करने का प्रभावी साधन हैं। समय के साथ कई सांस्कृतिक धरोहरें विलुप्त होने के खतरे में हैं। ऐसे में फिल्म निर्माण के जरिए इन परंपराओं को रिकॉर्ड कर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है।
युवा पीढ़ी को रचनात्मकता की ओर मोड़ने का संदेश
कार्यक्रम में राज्यपाल ने युवाओं में बढ़ती मोबाइल निर्भरता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि डॉक्यूमेंट्री फिल्में और कला आधारित गतिविधियां युवाओं को रचनात्मक दिशा दे सकती हैं। कलाकारों और शिक्षकों को मिलकर ऐसे प्रयास करने चाहिए जो बच्चों और युवाओं को कला, संगीत और संस्कृति से जोड़ सकें।
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