रायपुर। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस के विरोध के चलते मोदी सरकार को कपड़ा एवं फुटवियर में जीएसटी की दरें बढ़ाने के निर्णय को वापस लेना पड़ा है। इसके पहले पेट्रोल डीजल में पाँच रु एवं दस रु की कटौती की गई तीन काले क़ृषि कानून वापस लिया गया और जीएसटी बढ़ाने का निर्णय वह वापस लिया गया। आगे आगे देखिए अभी तो रसोई गैस के बढ़े दाम, पेट्रोल डीजल में लगाई गई मनमाना एक्साइज ड्यूटी और सरकारी संपत्तियों का निजीकरण के फैसले भी वापस होंगे।केंद्र में एक अपरिपक्व अनुभवहीन अहंकारी सरकार बैठी हुई है जो जनता की आवाज को दबाकर कुचल कर मनमानी करती है। मन की बात तो करती है लेकिन जन की आवाज को ना तो सुनती है ना समझती है।


मोदी सरकार के जनविरोधी, महंगाई बढ़ाने वाली निर्णय के खिलाफ कांग्रेस पार्टी और देश भर में व्यापारी संगठन सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे थे हर मोर्चे पर इसका विरोध किया जा रहा था। कांग्रेस सरकार के दौरान कपड़ा फुटवियर में टैक्स नहीं लगता था मोदी सरकार कपड़ा और फुटवियर में 5 प्रतिशत जीएसटी वसूली रही थी जिसे बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया था।


प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार को अब पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा के चुनाव में करारी हार के संकेत मिल चुके हैं हार के डर से भयभीत मोदी सरकार अब अपने जनविरोधी फैसले को वापस ले रही है और घुटने टेक रही है इसके पहले कई राज्यों में हुए विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा के प्रत्याशियों की करारी हार हुई कुछ जगह भाजपा के प्रत्याशी की जमानत तक जप्त हो गई। जिसके बाद पेट्रोल डीजल में पांच रुपए एवं दस रु की कटौती किया गया तथा तीन काले कृषि कानून को वापस लिया गया है अब कपड़ा और फुटवियर में जीएसटी बढ़ाने के निर्णय को वापस लेकर मोदी सरकार ने बता दिया कि उन्हें देश चलना आता नहीं है।


प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि बीते 7 साल से मोदी सरकार के जनविरोधी नीतियों का दुष्परिणाम देश की 135 करोड़ जनता भुगत रही है अचानक की गई नोटबंदी और कई स्लैब में लागू की गई जीएसटी के चलते व्यापार-व्यवसाय तबाह हो गए हैं रोजी रोजगार के गंभीर संकट उत्पन्न हो रहे हैं देश आर्थिक मंदी के बहुत खतरनाक दौर से गुजर रहा है टैक्स कलेक्शन में भी भारी क्षति हुई है मोदी सरकार के अव्यावहारिक नासमझी और जानकारों की सलाह पर अमल नहीं करने का नतीजा है कि अब तक जीएसटी में 2000 से अधिक बदलाव किया जा चुका है उसके बावजूद जीएसटी व्यापारियों के व्यापार के लिए घातक साबित हो रही है।


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