राजीव गांधी किसान न्याय योजना कृषकों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना का उद्देश्य धान, मक्का और गन्ना फसलों के लिए किसानों को आर्थिक सहायता देना है। बता दें इस योजना के अंतर्गत 20 लाख किसानों को ये राशि बैंकों के माध्यम से दिए जाने का प्रावधान है। हालही में राज्य सरकार ने दूसरी किस्त के रूप में 5700 करोड़ की रकम किसानों के खाते में डाली है।

किसानों को फसल उत्पादन के लिए प्रोत्सहित करने तथा कृषि रकबे में वृद्धि करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. राजीव गांधी की पुण्यतिथि 21 मई से इस योजना की शुरूआत की गई। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2019-20 में कुल 5 हजार 750 करोड़ रुपए की राशि चार किश्तों में किसानों के खातों में डाली गई। इसमें 2 अक्टूबर 2020 तक 3 हजार करोड़ रूपये की राशि किसानों तक पहुंची। तीसरी किस्त का भुगतान 01 नवम्बर 2020 को किया गया था। वर्तमान में इस योजना से प्रदेश के 19 लाख किसान लाभान्वित हो रहे हैं। योजना के शुरूआती वर्ष में धान, मक्का, और गन्ना (रबी) की फसलों को शमिल किया गया है.

भूमिहीन खेतिहार मजदूरों का भी समावेश

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के भूमिहीन खेतिहार मजदूरों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के दूसरे चरण में शामिल करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसके लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति का गठन किया था।जिसने विस्तृत कार्य योजना तैयार की।

उद्ददेश्य

जैविक खेती को बढ़ावा देने, ग्रामीण एवं शहरी स्तर पर रोजगार के नये अवसरों का निर्माण करने, गोपालन एवं गो-सुरक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ पशुपालकों को आर्थिक रूप से लाभान्वित करना इस योजना का उद्देश्य है। योजना के तहत 20 जुलाई 2020 को हरेली उत्सव के दिन से गोबर की खरीदी शुरू की गई है। वर्तमान में 5454 गौठानों में 2 रुपए प्रति किलों की दर से ग्रामीणों तथा गोबर संग्राहकों से गोबर खरीदी की जी रही है। राज्य में 184899 पंजीकृत व 88810 लाभान्वित पशुपालक शामिल हैं। खरीदे गये गोबर से स्व-सहायता समूहों द्वारा वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा योजनान्तर्गत 8 रूपये प्रतिकिलो की दर से ‘गोधन वर्मी कम्पोस्ट’ की बिक्री भी की जा रही है।