ग्राम स्वशासन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित टास्क फोर्स की पहली बैठक में ग्राम स्वशासन को सशक्त बनाने और वन अधिकार अधिनियम (FRA) तथा पेसा कानून (PESA) के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में अनुसूचित क्षेत्रों के समावेशी विकास, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्राम सभाओं की भूमिका को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।

मुख्य बातें

  • मुख्यमंत्री ने टास्क फोर्स की पहली बैठक की अध्यक्षता की।
  • FRA और पेसा कानून के बेहतर समन्वय पर जोर।
  • राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति गठित होगी।
  • जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों को सक्रिय किया जाएगा।
  • ग्राम सभाओं की भूमिका मजबूत करने के निर्देश।
  • जनजागरूकता अभियान चलाने पर बल।

ग्राम स्वशासन को सशक्त बनाने पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों के विकास में ग्राम स्वशासन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार और प्रभावी भूमिका दी जाए।

बैठक में वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत व्यक्तिगत और सामुदायिक दावों, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFRR) तथा वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित करने की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

ग्राम स्वशासन के लिए बनेगा बेहतर समन्वय तंत्र

मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के नियमों और प्रक्रियाओं में समन्वय स्थापित करने के लिए राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति गठित करने के निर्देश दिए। यह समिति समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करेगी और उसके प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी भी करेगी।

उन्होंने जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों को सक्रिय करने तथा लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए। सरकार का उद्देश्य स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाकर विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है।

आदिवासी क्षेत्रों के विकास को मिलेगी नई गति

सरकार का मानना है कि वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के प्रभावी समन्वय से अनुसूचित क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति बढ़ेगी। इससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, स्थानीय रोजगार, जनभागीदारी और सतत विकास को नई मजबूती मिलेगी।

प्रमुख अपडेट

  • टास्क फोर्स की पहली बैठक आयोजित हुई।
  • ग्राम सभाओं को मजबूत बनाने पर जोर।
  • राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति बनेगी।
  • जिला स्तरीय निगरानी समितियां सक्रिय होंगी।
  • जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
  • FRA और PESA के समन्वित क्रियान्वयन पर फोकस।

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