रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज चंदखुरी के माता कौशल्या मंदिर जीर्णोद्धार कार्यक्रम के पहले प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में अलग अलग जाति है और अलग-अलग संस्कृति है, इसी संस्कृति को बढ़ाने का कार्य कांग्रेस सरकार कर रही है। रतनपुर की महामाया से लेकर हर देवी देवताओं के उपासक यहां है, अलग-अलग जनजातियों के आस्था के केंद्र को संरक्षित करने का कार्य सरकार कर रही है।

भूपेश बघेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 15 साल सत्ता में रहते हुए भी बीजेपी ने राम को मौत के रूप में देखा है। राम के नाम पर केवल वोट मांगा है। लेकिन कौशल्या माता के लिए कुछ नहीं कर पाई है और 15 सालों में बीजेपी केवल राम के नाम की राजनीति करती रही। उन्होंने कहा कि बीजेपी सिर्फ राम के सहारे वैतरणी पार करना चाहते है। लेकिन असल सच्चाई जब आती है तो कलई खुल जाती है।

कुछ लोग इन्हें वोट के राम समझते हैं: भूपेश

श्री राम की माता छत्तीसगढ़ से हैं और भगवान राम के व्यक्तित्व निर्माण में उनकी अलग ही भूमिका है। भगवान श्री राम के व्यक्तित्व निर्माण में छत्तीसगढ़ का जनजीवन है। जिसमें हमने संत कबीर, तुलसी, शबरी और कौशल्या के राम को भांचा और बनवासी राम के रूप में देखा है। कुछ लोग उन्हें वोट के राम के रूप में देखते हैं।

136 करोड़ 55 लाख की राशि से चंदखुरी मंदिर का निर्माण

सीएम ने कहा कि कोरिया से लेकर बस्तर तक श्री राम के पद चिन्ह मिलते हैं। उन्हीं में से नौ स्थानों को विकसित करने का बीड़ा कांग्रेस सरकार ने उठाया है। जिसमें 136 करोड़ 55 लाख की राशि से चंदखुरी मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के लोग श्री राम को भांजा मानते है और हम भांजा को प्रणाम करते है.. इसलिए हम भांचा राम कहते हैं। छत्तीसगढ़ में ही रामनामी मिलेंगे। यह हमारी संस्कृति में बसा हुआ है। चाहे भांजा राम हो, बनवासी राम हो या शबरी के राम हो, छत्तीसगढ़ के लोग उन्हें पूजते हैं।

चंदखुरी में 3 दिनों का कार्यक्रम आयोजित

चंदखुरी में 3 दिनों का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। जिसमें प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर के कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। उन्होंने बताया कि हमने राम को अलग-अलग रूपों में देखा है, स्वगुण में भी देखा है निर्गुण में भी देखा है।