रायपुर/27 अक्टूबर 2021। छत्तीसगढ़ में बाघों की घटती संख्या को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के द्वारा लगाए जा रहे तथ्यहीन और आधारहीन आरोप पर पलटवार करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि जो आंकड़े केंद्र सरकार के द्वारा जारी किए गए हैं उसके अनुसार वर्ष 2014 में छत्तीसगढ़ में बाघों की कुल संख्या 46 थी जो 2018 में घट कर केवल 19 रह गए। उक्त संदर्भ में भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाना हास्यास्पद है। भाजपा याद करें कि दिसंबर 2018 तक रमन सिंह के नेतृत्व में उन्हीं की सरकार थी और उनका आरोप रमन सरकार के पुरुषार्थ को ही चुनौती है। कहीं ऐसा तो नहीं कि कांग्रेस के बहाने बृजमोहन अग्रवाल रमन सिंह को ही निशाने पर ले रहे हैं? 1976 में 42वें संविधान संशोधन के तहत वन और वन्य प्राणी को समवर्ती सूची में रखा गया है। 2006 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने मनमोहन सिंह के नेतृत्व में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (2006) पारित किया, जिसके तहत बाघों के संरक्षण के लिए तीन अलग अलग कमेटियां बनाने का निर्देश तत्कालीन रमन सरकार को दिया गया था। साथ ही रैपिड रिस्पांस टीम भी गठित करने का दायित्व तत्कालीन प्रदेश सरकार का था। 2006 से 2018 तक 12 साल में रमन सिंह सरकार ने न तो कमेटियां गठित की और ना ही उक्त संदर्भ में किसी भी प्रकार की बैठक की शुरुआत की। 15 साल तक रमन सरकार के कुशासन, उपेक्षा और उदासीनता का ही परिणाम है कि 2003 से 15 तक के आंकड़ों में छत्तीसगढ़ में वन क्षेत्र में लगभग 3 परसेंट की कमी दर्ज की गई। केंद्रीय सर्वे की रिपोर्ट में यह बताया गया कि रमन सरकार के उक्त वर्षों के दौरान लगभग 3700 वर्ग किलोमीटर का जंगल छत्तीसगढ़ में कम हुआ है। वर्ष 2010 में तत्कालीन यूपीए सरकार के समय केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश जी ने देश के 7 अलग-अलग स्थानों को अतिमहत्वपूर्ण जैव विविधता संपन्न क्षेत्र मानते हुए “नो गो एरिया“ घोषित किया था, जिसमें छत्तीसगढ़ का “हसदेव अरण्य क्षेत्र और तमोर पिंगला क्षेत्र“ भी शामिल था। नो गो एरिया से तात्पर्य यह होता है कि उक्त क्षेत्र से 10 किलोमीटर की दूरी तक खनन की गतिविधियां पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दी जाती है। 2014 में मोदी सरकार आने के बाद उक्त नो गो एरिया का क्षेत्र घटाकर कम कर दिया गया और पांचवी अनुसूची में शामिल उस क्षेत्र की ग्राम सभाओं के 470 से अधिक आपत्तियों को दरकिनार कर, जिसमें राज्य सरकार की भी आपत्ति थी, प्रतिबंधित क्षेत्र में अपने चंद पूंजीपति मित्रों को खनन की अनुमति मोदी सरकार ने दी है। इसी के विरोध में विगत दिनों सरगुजा संभाग के आदिवासी भाइयों ने लगभग 350 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर रायपुर में महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री से भेंट कर अपना विरोध दर्ज कराया। वर्ष 2007 में छत्तीसगढ़ में 450 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हाथी रिजर्व बनाने के लिए केंद्र की यूपीए सरकार ने अनुमति दी थी, 2018 तक रमन सिंह मुख्यमंत्री रहे मगर उन्होंने उक्त संदर्भ में अधिसूचना ही जारी नहीं की। दरअसल रमन सरकार की मंशा ही नहीं थी कि छत्तीसगढ़ में वन और वन्य जीव का संरक्षण किया जाए। रमन सरकार की प्राथमिकता अधिक से अधिक खनन और निजी पूंजी पतियों को खदानों का आवंटन ही रहा है।
प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भूपेश बघेल सरकार की प्राथमिकता गांव, गरीब, किसान, आदिवासी, गोपालक, महिला और युवाओं के साथ ही छत्तीसगढ़ के वन और वन्य प्राणीयों के संरक्षण और संवर्धन पर भी है। कांग्रेस सरकार में 4,38,000 से अधिक वन भूमि पट्टा तथा 40,000 से अधिक सार्वजनिक पट्टों के आवंटन के बावजूद छत्तीसगढ़ में वन क्षेत्र का रकबा लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय सर्वे के द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 से 19 के बीच छत्तीसगढ़ में वन क्षेत्र का रकबा 63 वर्ग किलोमीटर बढा है। छत्तीसगढ़ में नए प्लांटेशन का सर्वाइवल दल लगभग 95 से 97 परसेंट है, जो देश में सर्वाधिक है। 1995 वर्ग किलोमीटर में लेमरू हाथी रिजर्व बनाने की दिशा में तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। उक्त क्षेत्र में बड़ी संख्या में पांचवी अनुसूची के क्षेत्र शामिल है, जहां ग्राम सभाओं की सहमति के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बेहतर व्यवस्थापन और पुनर्वास के लिए लगातार चर्चा जारी है। अचानकमार क्षेत्र से कान्हा तक जो मध्यप्रदेश का हिस्सा है उसे सीमावर्ती राज्यों से समन्वय बनाकर बाघ संरक्षण के लिए डिवेलप किया जा रहा है। भाजपा नेताओं का जो आरोप है वह आंकड़े पूर्वर्ती रमन सिंह सरकार के दौरान के हैं 2014 में जब 46 बार थे तब भी रमन सिंह की सरकार थी और 2018 में जब घटकर 19 रह गए तब भी रमन सिंह की सरकार थी ना केवल वन्यजीव बल्कि छत्तीसगढ़ में लगभग 3700 वर्ग किलोमीटर जंगल भी रमन सिंह के कुशासन में कम हुए। वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा 2020 में इंद्रावती टाइगर रिजर्व में रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया गया है, जिससे बाघों के संरक्षण की दिशा में तेजी से काम हो रहे हैं। भूपेश बघेल सरकार में तो गांव, गरीब, किसान, आदिवासी, वन और वन्य प्राणी सभी समृद्ध हुए हैं।
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