20 लाख रुपए तक का सरकारी ठेका भी मिलेगा

छत्तीसगढ़ सरकार ने बेरोजगार इंजीनियर युवाओं को लेकर बड़ा फैसला किया है। डिप्लोमा और स्नातक इंजीनियरों को सरकारी ठेकों में अनिवार्य रूप से नौकरी देनी होगी। वहीं स्वरोजगार के विकल्प भी मौजूद रहेंगे। साथ ही ई श्रेणी पंजीयन प्रणाली को राज्य सरकार के सभी विभागों में लागू कर दिया गया है।

छत्तीसगढ़ियों को स्थानीय कारखानों में नौकरी मिलेगी। सरकार ने इसके लिए ठोस प्रयास किया है। प्रदेश के शिक्षित बेरोजगार इंजीनियरों को राज्य में ही कार्य उपलब्ध हो सकेगा।

कई प्रोजेक्ट अब तक शुरू नहीं हुए

लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्माण कार्यों में ठेकेदारों से होने वाले अनुबंध में इंजीनियरों की नियुक्ति की बाध्यता का प्रावधान किया गया है। इसके तहत डिप्लोमा इंजीनियर, डिग्रीधारी इंजीनियर तथा प्रोजेक्ट मेनेजर के पद पर नौकरी देने का प्रावधान किया गया है। इस नियम के तहत अब तक ठेकेदारों द्वारा 230 डिप्लोमा इंजीनियरों को प्रदेश के चार जिले मुंगेली, दंतेवाड़ा, कोंडागांव और नारायणपुर को छोड़कर सभी जिलों में रोजगार दिया गया है। वहीं 751 डिग्री इंजीनियरों को सभी जिलों में तथा 29 प्रोजेक्ट मैनेजर को 12 जिलों में रोजगार उपलब्ध कराया गया है। प्रदेश में अब तक 1010 इंजीनियरों को इसका लाभ मिला है। प्रदेश में कोरोना के कारण अभी कई प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं हो पाया है। आने वाले समय में उन्हें लाभ होगा।

डिप्लोमा को 15 व स्नातक इंजीनियर को 25 हजार प्रतिमाह

लोक निर्माण विभाग की ओर से निर्माण कार्यों के कांट्रेक्ट में 20 लाख रुपए से अधिक लागत के कार्यों में डिप्लोमा इंजीनियर की नियुक्ति को अनिवार्य किया गया है। साथ ही एक करोड़ से अधिक के कार्यों में स्नातक इंजीनियर की नियुक्ति की जाएगी। डिप्लोमा इंजीनियर को 15 हजार रुपए और स्नातक इंजीनियर को 25 हजार रुपए न्यूनतम वेतन का प्रति माह भुगतान किया जाएगा।

अब यह आदेश सभी सरकारी विभागों, मंडलों और बोर्डों पर लागू

दरअसल, सरकार ने पीडब्ल्यूडी के ठेकों में ई श्रेणी पंजीयन प्रणाली लागू की है। माध्यम से स्थानीय बेरोजगार युवकों को 20 लाख रुपए तक की लागत के एकल कार्य ब्लॉक स्तर पर टेंडर से देने का प्रावधान किया गया है। अब पीडब्ल्यूडी के लिए दिए गए दोनों निर्णयों को सभी निर्माण विभागों, निकायों, मंडलों, बोर्ड में भी अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिल सके।