राष्ट्रीय परिवार और स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के मुताबिक देश में पुरुषों के मुकाबले अब महिलाओं की संख्या ज्यादा हो गई है. भारत अब लैंगिक समानता की ओर आगे बढ़ रहा है. देश में अब हर एक हजार पुरुषों पर एक हजार बीस महिलाएं हो गई हैं. प्रजनन दर में भी कमी आई है जिससे जनसंख्या विस्फोट का भी खतरा घटा है. सर्वे के ताज़ा आंकड़ों में कहा गया है कि भारत में अब 1000 पुरुषों पर 1020 महिलाएं हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को ये आंकड़े जारी किए. बता दें कि NFHS बड़े पैमाने पर किया जाने वाला एक सर्वेक्षण है,जिसमें हर परिवार से सैंपल लिए जाते हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 24 नवंबर को ये आंकड़ें जारी किए हैं.
पहली बार देश में प्रजनन दर 2 पर आ गई है. 2015-16 में यह 2.2 थी. खास बात ये है कि 2.1 की प्रजनन दर को रिप्लेसमेंट मार्क माना जाता है. यानी 2.1 की प्रजनन दर पर आबादी की वृद्धि स्थिर बनी रहती है. इससे नीचे प्रजनन दर आबादी की वृद्धि दर धीमी होने का संकेत है.NFHS-5 में साल 2019-20 के दौरान हुए सर्वेक्षण के डेटा को इकठ्ठा किया गया. इस दौरान लगभग 6.1 लाख घरों का सर्वेक्षण किया गया है. NFHS-5 में इस बार कुछ नए विषय जैसे- पूर्व स्कूली शिक्षा, दिव्यांगता, शौचालय की सुविधा, मृत्यु पंजीकरण, मासिक धर्म के दौरान स्नान करने की पद्धति और गर्भपात के तरीके और कारण शामिल हैं.
राष्ट्रीय परिवार और स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों के अनुसार देश में पुरुषों के मुकाबले अब महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. अब हर 1000 पर 1020 महिलाएं हो गई हैं. 1990 के दौरान हर 1000 पुरुषों के मुकाबले महज 927 महिलाएं थी. साल 2005-06 में NFHS के आंकड़ों में महिलाओं और पुरुषों की संख्या 1000-1000 थी. हालांकि इसके बाद इसमें गिरावट दर्ज की गई. 2015-2016 में 1000 पुरुषों के मुकाबले 991 महिलाएं थीं. हालांकि अब महिलाओं ने संख्या के मामले में पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है.
jai sir is a dedicated news blogger at The Hind Press, known for his sharp insights and fact-based reporting. With a passion for current affairs and investigative journalism, he covers national, international, sports, science, headlines, political developments, environment, and social issues with clarity and integrity.
