रायपुर। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। धान की नई किस्मे विकसित करने वाले इंदिरा गांधी कृषि विश्वविदयालय के वैज्ञानिक ने धान से प्रोटीन और शुगर-फ्री सिरप बनाने का फॉर्मूला तैयार किया है। इस तकनीक से तैयार प्रोडक्ट युवाओं को मसल्स बढ़ाने और डायबिटिज रोगियों को शुगर कंट्रोल करने के में मददगार साबित होगा। कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस फॉर्मूला को रजिस्टर्ड कर लिया है। प्रदेश सहित देश के बड़े कंपनियों ने इसमें रूचि जाहिर की है। इसके लिए जल्द नीलामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
धान से 70 प्रतिशत प्रोटीन निकालने में कामियाब
कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बताया कि धान से चावल बनाने के अलावा कई प्रोडक्ट पहले से बनते रहते हैं। धान से 70 प्रतिशत प्रोटीन निकलने की प्रक्रिया वैज्ञानिकों ने 3 साल में ही तैयार कर ली है।
इस तकनीक से निकलेगा प्रोटीन
मशीन का सेटअप लगने के बाद धान में पानी डाला जाएगा। रात भर धान पानी में भीगता रहेगा। अगले दिन उसे पीसकर उसका पेस्ट बनाया जाएगा। इसके बाद सॉलिड और लिक्विड पार्ट को अलग किया जाएगा। लिक्विड पार्ट को जिस मशीन में डाला जाएगा उसमें पीएच की मात्रा एडजस्ट की जाएगी। पीएच एडजस्ट करने के बाद स्प्रे-ड्रायर में लिक्विड डाला जाएगा। स्प्रे-ड्रायर में लिक्विड जाने के बाद प्रोटीन तैयार होगा। तैयार प्रोटीन की क्वॉलिटी चेक होगी उसके बाद स्टोरेज कर के पैक कर दिया जाएगा।
93 लाख रूपए आई लागत
वैज्ञानिकों ने बताया कि प्रोटीन और सिरप बनाने में लगभग 93 लाख खर्च किया गया है। तीन वैज्ञानिकों की टीम के अलावा विश्वविद्यालय के छात्र भी शामिल हैं। तकनीक का निर्माण करने में डॉ. सुभा बनर्जी, डॉ. गिरीश चंदेल समेत छात्रों और कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा।
jai sir is a dedicated news blogger at The Hind Press, known for his sharp insights and fact-based reporting. With a passion for current affairs and investigative journalism, he covers national, international, sports, science, headlines, political developments, environment, and social issues with clarity and integrity.
