राज्य सरकार ने 23 लाख टन उसना चावल लेने लिखा केंद्र सरकार को पत्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ और केंद्र सरकार के बीच राज्य के चावल को सेंट्रल पूल में लिए जाने के मामले को लेकर खाद्य सचिव ने केंद्र को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि राज्य से 23 लाख मीट्रिक टन उसना चावल सेंट्रल पूल के लिए लिया जाए। दूसरी ओर राज्य में चावल मामले को लेकर सियासत भी गरमा रही है। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि पिछले साल भी 60 लाख टन चावल लेने की बात कहकर केंद्र ने 24 लाख मीट्रिक टन ही लिया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि केंद्र सरकार राज्य से सेंट्रल पूल में उसना चावल नहीं लेने की बात कहकर एक बार फिर से राज्य के किसानों और प्रदेश के मिलरों के हितों के खिलाफ कदम उठा रही है।

केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन- 2021 के धान से निर्मित होने वाले चावल को सेंट्रल पूल में लेने कोटा बढ़ाया है। केंद्र ने सैद्धांतिक सहमति दी है कि इस साल 61.65 लाख मीट्रिक टन चावल सेंट्रल पूल के लिए लिया जाएगा, लेकिन इसके साथ ही यह शर्त भी रखी गई है कि राज्य से उसना चावल नहीं लिया जाएगा। अब विवाद इसी बात को लेकर है कि अगर उसना चावल नहीं लिया गया तो राज्य के मिलरों को भारी संकट का सामना करना पड़ेगा।

ये है चावल लेने का गणित

राज्य के लिए यह पहला अवसर है, जब केंद्र सरकार ने उसना चावल लेने से इनकार किया है। केंद्र ने सेंट्रल पूल के लिए जो 61.65 लाख मीट्रिक टन चावल लेने की बात कही है, उसमें से राज्य के लिए नान कोटे का चावल भी शामिल होगा, लेकिन राज्य सरकार चाहती है कि सेंट्रल पूल के लिए 45 लाख मीट्रिक टन चावल में 23 लाख मीट्रिक टन उसना चावल लिया जाए।

मिलरों को होगा नुकसान

केंद्र सरकार अगर उसना चावल नहीं लेती है तो राज्य के मिलरों के साथ सरकार को भी नुकसान होगा। इसके पीछे वजह ये बताई जाती है कि राज्य के कुछ हिस्सों में किसान जो धान उगाते हैं, उससे उसना चावल ही बेहतर तरीके से बनता है। इस प्रकार के धान से अगर अरवा चावल बनाने की कोशिश की जाती है तो टूटन अधिक होती है। बताया गया है कि इस बदलाव से राज्य में कई उसना उत्पादक राइस मिलें बंद हो सकती हैं।

केंद्र को लिखा पत्र

राज्य सरकार की ओर से इस मामले को लेकर खाद्य सचिव टीपी वर्मा ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि राज्य से अरवा के साथ उसना चावल भी 23 लाख मीट्रिक टन लिया जाए। श्री वर्मा ने बताया कि इस पत्र का अब तक कोई जवाब नहीं आया है, लेकिन इसके बाद केंद्र ने पत्र जारी कर पूरा अरवा चावल लेने की बात कही है। पिछले साल भी 60 लाख की सहमति, पर लिया 24 लाख एक बार फिर केंद्र सरकार द्वारा चावल जमा करने के लिए 61 लाख मीट्रिक टन की अनुमति मिलने पर राज्य के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा, केंद्र सरकार ने पिछले साल भी 60 लाख मीट्रिक टन की अनुमति दी थी, लेकिन केवल 24 लाख मरट्रिक टन चावल एफसीआई में जमा करने की अनुमति मिली। अभी 61 लाख मीट्रिक टन चावल की अनुमति दी है। अनुमति से राहत तो है, पर राज्य से केवल अरवा चावल ही लिया जाएगा उसना नही। केंद्र को दोनों चावल मिलाकर ही दिया जाता था। जिसकी वजह से यहां चावल देने में सरकार को परेशानी होगी।

राज्य को परेशान करने की नीयत

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि मोदी सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। चालू खरीफ वर्ष के लिए मोदी सरकार के छत्तीसगढ़ से 61 मीट्रिक टन चावल लेने की सैद्धांतिक सहमति में भी राज्य को परेशान करने की नीयत साफ दिख रही है। जिस प्रकार से केंद्र सरकार ने इस वर्ष उसना चावल सेंट्रल पूल में लेने से मनाही की है। ये मोदी सरकार और भाजपा की किसान विरोधी नीति को उजागर करता है।