छत्तीसगढ़ के देवी तीर्थ स्थलों की देश-दुनिया में प्रसिद्धि है। मां बम्लेश्वरी, मां दंतेश्वरी और मां महामाया के दर्शनों के लिए देश -विदेश से लाखों श्रद्धालु हर साल पहुंचते हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने मां बम्लेश्वरी धाम डोंगरगढ़ को प्रसाद योजना में शामिल किया है। 44.33 करोड़ रुपए की स्वीकृति हो चुकी है। काम भी शुरू हो गया है। अब पर्यटन मंडल केंद्र की इसी योजना में मां महामाया और मां दंतेश्वरी मंदिर को भी शामिल करवाने की तैयारी में है। रतनपुर स्थित महामाया धाम के प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए मंडल द्वारा कंसल्टेंट एजेंसी भी नियुक्त कर दी है। अगले, 4-5 महीने में यह प्रोजेक्ट सब्मिट हो कर दिया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक महामाया मंदिर में रोप-वे के जरिए श्रद्धालुओं को पहुंचाने की व्यवस्था होगी। दंतेश्वरी धाम को लेकर भी कवायद जारी है। आपको बता दें कि कोरोना काल में छत्तीसगढ़ में स्थानीय पर्यटन बढ़ा है। बीते 16-17 महीनों में 67 लाख पर्यटन छत्तीसगढ़ पहुंच चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा पर्यटन धार्मिक स्थलों तक पहुंचे। यही वजह है कि राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन पर विशेष फोकस किए हुए है। राम वन गमन पथ सरकार इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यह सरकार का भी ड्रीम प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट पर युद्ध स्तर पर काम जारी है।

प्रोजेक्ट पर काम तेज़

मंडल के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक कोरोना काल की वजह से थोड़े समय काम बंद था, मगर अब काम रफ्तार से जारी है। मंदिर से लगी 3 पहाडिय़ों के बीचों-बीच श्रीयंत्र की आकृति का एक स्ट्रक्चर बनाया जा रहा है। इसमें तीर्थ यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था, पुस्तकालय, ध्यान केंद्र, एपी थिएटर रहेगा। मंदिर परिसर को भी रिनोवेट किया जाएगा।

आखिर क्या है प्रसाद योजना

पर्यटन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2014-15 में चिह्नित तीर्थ स्थलों के समग्र विकास के उद्देश्य से ‘तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक संवर्द्धन पर राष्ट्रीय मिशन’ शुरू किया गया था। अक्तूबर 2017 में योजना का नाम बदलकर ‘तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्द्धन अभियान’ (यानी ‘प्रसाद’) राष्ट्रीय मिशन कर दिया गया।

योजना के तहत केंद्र सरकार ने प्रथम चरण में देश के 26 धार्मिक तीर्थ स्थलों का चयन किया है। इन्हें पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जा रहा है ताकि देश-विदेश के पर्यटक यहां पहुंच सकें। पर्यटन को बढ़ावा मिले। इन स्थलों की प्रसिद्धी का विस्तार हो।

प्रसाद योजना का उद्देश्य

  • महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय/वैश्विक तीर्थ और विरासत स्थलों का कायाकल्प एवं आध्यात्मिक संवर्द्धन।
  • समुदाय आधारित विकास का पालन करना और स्थानीय समुदायों में जागरूकता पैदा करना।
  • आजीविका उत्पन्न करने के लिये विरासत शहर, स्थानीय कला, संस्कृति, हस्तशिल्प, व्यंजन आदि का एकीकृत पर्यटन विकास।
  • अवसंरचनात्मक कमियों को दूर करने के लिये तंत्र को सुदृढ़ बनाना