इस्लामाबाद। बलत्कारियों के लिए हर देश में अलग अलग सजा का प्रावधान है। हाल ही में पाकिस्तान ने बलात्कारियों को रासायनिक तरीक़े से नपुंसक बनाए जाने की सज़ा का कानून लागू कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य सजा में तेजी लाना और कड़ी सजा देना है। यह विधेयक देश में महिलाओं और बच्चों के साथ दुष्कर्म की घटनाओं में हालिया वृद्धि और अपराध पर प्रभावी रूप से अंकुश लगाने की बढ़ती मांगों के खिलाफ सार्वजनिक आक्रोश के फलस्वरूप लाया गया है। पाकिस्तान सरकार ने दुष्कर्म के अपराध को नए सिरे से परिभाषित भी किया है।

राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के पाकिस्तानी मंत्रिमंडल द्वारा पारित अध्यादेश पर मुहर लगाने के लगभग एक साल बाद यह विधेयक पारित हुआ है। इस क़ानून को लेकर कानून मंत्री फ़ारुघ़ नसीम का कहना है कि अंतराष्ट्रीय क़ानूनों के मद्देनज़र नपुंसक बनाने से पहले दोषी की सहमति लेना ज़रुरी है। अन्यथा नपुंसक बनाने के फ़ैसले को बलात्कारी की तरफ़ से कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। कोर्ट ही इस सज़ा पर मुहर लगा सकता है। कोर्ट यह भी तय करेगा कि दोषी को कुछ समय के लिए नपुंसक बनाया जाए या फिर पूरी उम्र के लिए। कानून में ये प्रावधान भी किया गया है कि अगर बलात्कार का दोषी अपनी सहमति नहीं देता है तो फिर उसे फांसी की सज़ा या फिर 25 साल की उम्र क़ैद दी जा सकती है। ये भी कोर्ट ही तय करेगा।

‘डान’ अखबार के मुताबिक आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक 2021 विधेयक को बुधवार को संसद के संयुक्त सत्र में 33 अन्य विधेयकों के साथ पारित कर दिया गया। अखबार ने बताया कि यह पाकिस्तान दंड संहिता, 1860 और दंड प्रक्रिया संहिता, 1898 में संशोधन करना चाहता है।

विधेयक के मुताबिक, “रासायनिक तौर पर नपुंसक बनाना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे प्रधानमंत्री द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विधिवत अधिसूचित किया जाता है, जिसके तहत एक व्यक्ति को अपने जीवन की किसी भी अवधि के लिए संभोग करने में असमर्थ बना दिया जाता है, जैसा कि अदालत द्वारा दवाओं के प्रशासन के माध्यम से निर्धारित किया जा सकता है जो एक अधिसूचित चिकित्सा बोर्ड के माध्यम से किया जाएगा।”

जमात-ए-इस्लामी के सांसद मुश्ताक अहमद ने इस विधेयक का विरोध किया और इसे गैर-इस्लामी और शरिया के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि दुष्कर्मी को सार्वजनिक रूप से फांसी दी जानी चाहिए लेकिन शरिया में कहीं नपुंसक बनाए जाने का उल्लेख नहीं है। रासायनिक रूप से नपुंसक बनाना यौन क्रिया को कम करने के लिए दवाओं का उपयोग है। मीडिया की खबरों के मुताबिक, दक्षिण कोरिया, पोलैंड, चेक गणराज्य और अमेरिका के कुछ राज्यों में यह सजा का कानूनी रूप है। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान में यौन उत्पीड़न या बलात्कार के चार प्रतिशत से भी कम मामलों में दोषसिद्धि होती है।

पाकिस्तान यौन अपराधियों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने की योजना भी बना रहा है, ताकि इस तरह के जुर्म को अंजाम देने वालों को सख़्त सज़ा दी जा सके। बार बार बलात्कार जैसा जघन्य अपराध करने वालों को रासायनिक तरीक़े से नपुंसक बनाने का कानून बनने से उम्मीद की जा रही है कि बलात्कार के अपराधों में कमी आएगी।

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