स्वास्थ्य मंत्री खेल रहे दिल्ली-दिल्ली, विशेष जनजातियों की मौतों पर नहीं ध्यान
चार माह में इस विशेष संरक्षित जनजाति के 20 लोगों की मौत
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव की उदासीनता को लेकर आम जनता अब यह कहने लगी है कि सरगुजा संभाग से राजनीति कर रहे और खुद को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताने में लगे मंत्री सिंहदेव भी पण्डो जनजाति के साथ हो रहे अन्याय की लगातार सामने आ रही वारदातों को लेकर कतई गंभीर नहीं हैं। प्रदेश के आदिवासी बहुल इलाकों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर पर सवालिया निशान लग गया है।
प्रदेश में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के विभाग के दावे जमीनी तौर पर खोखले नजर आ रहे हैं। सुपोषण के नाम पर चलने वाली योजनाओं का हाल ये है कि बलरामपुर जि़ले के दोलंगी में पण्डो जनजाति के एक ही परिवार के दो पुत्र सहित पिता की चार दिन के अंतराल में कुपोषण के कारण मृत्यु हुई है। साथ ही यहां पर स्वस्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण उन्हें सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। चार माह में इस विशेष संरक्षित जनजाति के 20 लोगों की मौत हो जाती है, इसी ब्लॉक में इसी जनजीति की एक प्रसूता महिला के साथ छुआछूत दिखाकर दुर्व्यवहार करके अस्पताल से भगा दिया जाता है, लेकिन विभाग को इस बात का जरा भी मलाल नहीं है और वह सत्ता-संघर्ष के खेल में मशगूल होकर सत्तालोलुपता का शर्मनाक प्रदर्शन कर रही है।
स्वास्थ्य विभाग में सुविधाएं बेहाल
स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में छत्तीसगढ़ के बेहतर प्रदर्शन के की ढफली पीटते प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के होते हुए भी बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं का आलम यह है कि प्रदेश के गांवों में बनाए गए स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली दूर करने के बजाय 63 नए सामुदायिक, प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना का ढोल पीटकर प्रदेश के लोगों को सब्जबाग दिखा रही है। विकास के तमाम दावों की जमीनी सच्चाई यही है कि बारिश आने के बाद खाट-कांवर और कंधों पर मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँचाया जाता है, और वहां भी बुनियादी सुविधाओं व संसाधनों की कमी तथा मौजूद स्टाफ द्वारा मरीजों के साथ बदसलूकी से मरीजों को दो-चार होना पड़ता है।
जमीन पर लिटाकर इलाज
कोरिया के बैकुंठपुर जि़ला अस्पताल में बच्चों में सर्दी-खांसी और बुखार के प्रकोप जैसे हालात और बच्चों को जमीन पर लिटाकर उनका इलाज कराए जाने की खबरों का हवाला देते हुए कहा कि मौसमी और छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी लोगों को शहरों की ओर जाने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
पण्डो जनजाति के लोगों की जान सांस में फंसी
आदिवासियों के प्रति विभाग का रवैया सौतेलापन से भरा हुआ है। बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर ब्लॉक के गांजर ग्राम में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र व विशेष संरक्षित पण्डो जनजाति की एक चार वर्षीया बच्ची की मौत पण्डो जनजाति के संरक्षण के प्रति दायित्व के विरूद्ध रही। न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में लोग अपनी जान गवां रहे हैं, बल्कि अब सत्तारूढ़ दल के स्वास्थ्य मंत्री के राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहे माफियाओं के कारण भी पण्डो जनजाति के लोगों की जान सांसत में पड़ गई है।
jai sir is a dedicated news blogger at The Hind Press, known for his sharp insights and fact-based reporting. With a passion for current affairs and investigative journalism, he covers national, international, sports, science, headlines, political developments, environment, and social issues with clarity and integrity.
