ग्रामीण इलाको में आबादी पट्टे का काम किया जाना है। इसके लिए गांव में सर्वे किया जाना है। सर्वेर्क्षण का काम ड्रोन से किया जा रहा है। इसी के तहत गुरुवार को भटगांव, जेवरा और खपरी, पाटन में कोपसी और कोपेडीह, धमधा में राजपुर व नंदौरि ग्राम में ड्रोन सर्वेक्षण किया गया। ड्रोन से खींची हुई तस्वीरों को सर्वे आफ इंडिया अपनी भौगोलिक सुचना प्रणाली प्रयोगशाला में संसाधित करेगा।
दुर्ग जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण आबादी के सर्वे के लिए राजस्व और पंचायत ग्रामीण विकास की टीम गठित की गई है। इस योजना के लिए तहसीलदार, नयाब तहसीलदार, आरआई, पटवारी और पंचायत की टीमें विशेष ड्यूटी पर लगाई गई है। योजना का मकसद समपत्ति सत्यापन की व्यवस्था बनाना है। ड्रोन से लिए लिए नक़्शे के बाद तहसीलदार और पटवारी को सौंप दिया जाएगा। हर एक मकान और भूमि का रिकॉर्ड मोबाइल एप्प पर अपलोड होगा।
जारी किया जाएगा संपत्ति कार्ड
ड्रोन सर्वेक्षण टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए आबादी वाले क्षेत्रों का सीमांकन आवासीय भूमि, आबादी के नजदीक की बसाहट और ग्रामीण की बस्ती को शामिल किया जाएगा। इन मानचित्रों के आधार पर ही ग्रामीण परिवार को संपत्ति कार्ड जारी किया जाएगा।
आबादी सर्वेक्षण से लाभ
ग्रामीणों को बैंक व अन्य वित्तीय संस्थानों से कई सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी।
संपत्ति संबंधी विवाद और कानूनी मामले भी कम किए जा सकेंगे।
लोन स्वामित्व योजना के तहत आबादी के क्षेत्र में बने हुए घर के रजिस्टर्ड दस्तावेज मालिक को उपलब्ध होंगे।
इस रजिस्ट्री के आधार पर ग्रामवासी बैंक से लोन ले सकेंगे।
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