राम वन पथ गमन के 75 में से 9 जगहों का विकास
रायपुर। छत्तीसगढ़ को भगवान श्री राम का ननिहाल माना जाता है। वनवास के 10 साल भगवान राम ने छत्तीसगढ़ में ही बिताए थे। राम के वनवास काल से जुड़े स्थलों को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए प्रारंभ की गई राम वन गमन पर्यटन परिपथ में पग-पग पर भगवान श्रीराम के दर्शन होंगे। छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम के ननिहाल के रूप में देश में अपनी अलग पहचान रखता है। राम वनगमन परिपथ योजना के अंतर्गत चंदखुरी में माता कौशल्या के मंदिर के सौदर्यीकरण और अन्य कार्यों का औपचारिक शुभारंभ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 7 अक्टूबर को किया।
मान्यता है कि भगवान राम ने छत्तीसगढ़ में ऋषि आश्रम, प्रकृति के मध्य वनवास काटा, इसलिए यहां की जनश्रुतियों, लोककथाओं, आम जनजीवन में भगवान श्रीराम रचे-बसे हैं। जनमान्यताओं के सम्मान में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की संकल्पना पर छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा भगवान श्रीराम के ननिहाल प्राचीन दक्षिण कौशल वर्तमान छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पर्यटन परिपथ के रूप में प्राचीनतम महत्व के स्थलों को वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
10 साल छत्तीसगढ़ में बिताए
राम वन गमन परिपथ योजना की औपचारिक शुरुआत नवरात्र के पहले दिन चंदखुरी में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। कार्यक्रम का शुभारंभ सीएम भूपेश बघेल ने किया। वनवास प्रवास के दौरान श्रीराम ने छत्तीसगढ़ में लम्बा समय बिताया है, मान्यता है कि श्रीराम के साथ सीता और लक्ष्मण ने 10 साल छत्तीसगढ़ में बिताये थे. जिन जगहों पर भगवान राम आए थे, ऐसे 75 स्थानों को चिह्नांकित कर वैश्विक पर्यटन के अनुरूप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
वनवास प्रवास के दौरान श्रीराम ने छत्तीसगढ़ में लम्बा समय बिताया है।
9 स्थानों को किया जाएगा विकसित
प्रथम चरण में कोरिया से सुकमा तक 2260 किलो मीटर की लंबाई तक 9 जगहों को रामायणकाल के वातावरण के अनुकूल विकसित करने का कार्य जारी है. तेजी से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कोरिया जिले से सुकमा तक कदम-कदम पर भगवान श्री राम के दर्शन होंगे और उनसे जुड़ी महत्व की कथाएं देखने और सुनने को मिलेंगी.
राम वन गमन पर्यटन परिपथ परियोजना में सीतामढ़ी हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) का 133 करोड़ 55 लाख रुपए की लागत से पर्यटन की दृष्टि से विकास का कार्य किया जा रहा है। प्रथम चरण के चयनित क्षेत्रों में चंदखुरी और राजिम में पर्यटन दृष्टिकोण से सर्वसुविधायुक्त निर्माण कार्य होंगे. रामाराम में पर्यटकों के रुकने की व्यवस्था एवं परिपथ निर्माण किया जाएगा. सिहावा में यात्रियों के ठहरने के लिए समरसता भवन, ऋषि आश्रम जीर्णोद्धार का कार्य होगा।
ये सुविधाएं होंगी
मधुबन धाम में पेयजल सुविधा, गार्डन निर्माण, तालाब सौंदर्यीकरण, शौचालय, विश्रामगृह, महानदी में स्टॉप डेम सहित वहां अंडरग्राउंड नाली निर्माण का कार्य होगा.इन जगहों में पेयजल सुविधा, गार्डन निर्माण, तालाब सौंदर्यीकरण, शौचालय, विश्रामगृह, सातधारा पैगोड़ा का निर्माण किया जा रहा है. इस पर्यटन परिपथ के माध्यम से राज्य में न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यटन के नए वैश्विक अवसर बढ़ेंगे. पर्यटन में रोजगार के अवसर बढऩे के साथ ही यह ग्रामीण अर्थव्यवथा को स्वावलंबी और मजबूत बनाएगा।
वाटरफ्रंट और कॉटेज का विकास
इसी तर्ज पर तुरतुरिया में कॉटेज बनाए जाएंगे, महानदी पर वाटरफ्रंट डेवलपमेंट और कॉटेज विकसित होंगे, शिवरीनारायण में राम की प्रतिमा के साथ चारों तरफ भव्य द्वार बनेगा, बस्तर व दंतेवाड़ा के गीदम में जटायु द्वार, बारसूर में ट्राइबल कॉटेज बनाया जा रहा है।
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