रायपुर। छत्तीसगढ़ में नई सरकार बनी तो शुरुआत दौर के कई महत्वपूर्ण फैसलों में एक जमीन के लिए जारी होने वाले कलेक्टर गाइडलाइन की दरों में वृद्धि न करने का था। इस निर्णय पर लोगों को लगा था कि इससे सरकार के राजस्व में नुकसान होगा, लेकिन मुझे पूरा विश्वास था कि इससे सभी वर्ग को लाभ होगा, और नतीजा आज सामने है। मैं मानता हूं कि सरकार का काम सिर्फ राजस्व में वृद्धि करना नहीं है, बल्कि लोगों के सपनों को पूरा करना होना चाहिए। यह बातें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने क्रेडाई की ओर से राजधानी के एक निजी होटल में आयोजित सम्मान समारोह में कहीं।

बघेल ने कहा कि स्वच्छतम प्रदेश के रूप में छत्तीसगढ़ को हाल ही में राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कृत किया गया। यह सब जनता के सहयोग और जागरूकता से संभव हो पाया है ,वहीं जब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री घोषित किया जाता है तो इसका मतलब होता है कि पूरे प्रदेश के नागरिकों ने अपने प्रदेश के विकास के लिए एकजुट होकर, पूरी लगन और पूरी क्षमता के साथ काम किया, तब जाकर देश में हम सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पाए।

पुरे क्षेत्र में विकास करना सरकार का उद्देश्य – सीएम बघेल

बघेल ने कहा कि, उनकी सरकार का उद्देश्य किसी एक क्षेत्र में ही विकास करना नहीं है, बल्कि जिस तरह के एक घर बनाने के लिए पूरी प्लानिंग होती है वैसे ही सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से चहुमुंखी विकास की दिशा में सभी क्षेत्रों में समन्वियत प्रयास किया। उन्होंने कहा कि पहले छत्तीसगढ़ की पहचान नक्सलगढ़ के रूप में होती रही है लेकिन प्रदेश के सभी लोगों ने मिलकर बहुत कम समय में नई पहचान दिलाने का काम किया।

गांव से लेकर शहरी तक योजनाओं के जरिए लोगों को हुआ लाभ

इसके लिए राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव हो या किसानों की कर्ज माफी जैसे काम सरकार ने किए, साथ ही कई ऐसी योजनाएं शुरू की गई, जिससे आज अंतरराष्ट्रीय स्तर हमारी सकारात्मक पहचान बनी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि, पहले उन्हें लेकर लोगों की मानसिकता थी कि वे सिर्फ गांव और ग्रामीणों के बारे में सोचते हैं लेकिन अब चेम्बर आफ कामर्स जैसी संस्था ने भी मान लिया है कि हमारी सरकार ने गांव से लेकर शहरी क्षेत्रों में अपनी योजनाओं के जरिए आम लोगों के जेब में पैसा डालने का काम किया है, जिससे व्यापारिक वर्ग को भी लाभ पहुंचा है।

कोरोना काल में भी मनरेगा का काम चालू रखा

उन्होंने कहा कि, जब कोरोना काल में पूरी दुनिया और देश के कई राज्यों में काम बंद थे। सभी की अर्थव्यवस्था बिगड़ी थी, तब हमारी सरकार ने आम जनता खासतौर से गरीब, मजदूर वर्ग की आवश्यकता को समझते हुए मनरेगा का काम चालू रखा। छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य रहा जहां न कर्मचारियों के वेतन में कटौती की गई, न विधायकों के वेतन काटे गए। सभी वर्गों के लिए सरकार ने सोचा, ऐसे में जब कोरोना काल में लोगों के खर्चे कम हुए तो लोगों की जेब में पैसा बचा जो रियल एस्टेट में इन्वेस्ट हुआ और मध्यम वर्ग तथा गरीब वर्ग के लोगों ने भी अपने घर के सपने को पूरा किया।