छत्तीसगढ़ में भूपेश सरकार को 36 महीनें हो गए हैं। कांग्रेस ने चुनाव से पहले जो वादे किए थे, आज तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रदेश कहां खड़ा है ये जानना जरूरी है। इन 36 महीनों में बघेल सरकार ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अपने 36 महीने के कार्यकाल में दाऊ ने लोगों का विश्वास जीता है। इसकी वजह है उनका घोषणा पत्र। तीन साल के कार्यकाल में इस सरकार ने करीब-करीब 25 वादे पूरे किए हैं और इसी की बदौलत ये लोगों का भरोसा जीतने में सफल रहे हैं। सरकार का ये घोषणा पत्र यहां लोगों की आवश्यकताओं का प्रतिबिंब था, जिसे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूरा किया। बीते डेढ़ दशकों में हमने देखा है कि अंधे विकास की दौड़ में किस तरह अपनी संस्कृति, प्रकृति, परंपरा और स्वाभिमान की अनदेखी की जाती रही है, लेकिन इस सबसे अलग हटकर वर्तमान सरकार छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान की रक्षा करते हुए सतत विकास की अवधारणा को साथ लेकर चल रही है।

आने वाले समय में राज्य सरकार अपनी घोषणा पत्र को पूरी तरह से लागू करने के लिए कदम उठा रही है। चाहे कुपोषण के खिलाफ लड़ाई हो या किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारनी हो या हर घर पानी पहुंचाने जैसी अन्य योजनाएं हों, ये सभी लागू करने की दिशा में काम हो रहा है। कांग्रेस सरकार अपने घोषणा-पत्र को लेकर चल रही हैं। गौठान योजना जैसी बहुत सारी चीजें हैं। इसके अलावा बघेल सरकार चुनौतियों का भी डटकर सामना कर रही है। 

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सत्ता संभालते ही किसानों को किया कर्जमुक्त

सरकार में आते ही किसान हितैषी इस सरकार ने अन्नदाताओं को प्राथमिकता में रखा। इसलिए सीएम बघेल ने सत्ता संभालते ही सबसे पहला दस्तखत किसानों की ऋण माफी के आदेश पर किया। टीम भूपेश ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार कृषि क्षेत्र पर प्रमुखता से जोर देते हुए ​विभिन्न फसलों के लिए एमएसपी भी तय किया। जिसमें धान के लिए एमएसपी 2500 रुपये प्रति क्विंटल, मक्का के लिए 1700, गन्ने के लिए 350 रुपये, सोयाबीन के लिए 3500 और चने के लिए 4700 रुपये शामिल है। भूपेश सरकार ने किसानों के लिए राजीव गांधी न्याय योजना लागू की। इसके अंतर्गत धान, गन्ना, या मक्का के उत्पादकों को 10,000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दिया जा रहा है। अब सभी फसलों को किसान न्याय योजना में शामिल किया जा चुका है। अन्य फसल लेने वालों को भी कृषि आदान सहायता दी जा रही है। इसी कड़ी में भूमिहीन कृषि मजदूरों को 6 हजार रुपये देने की घोषणा भी की गई है।

खुशहाल किसान

हर वर्ग को साथ लेकर चल रही भूपेश सरकार

प्रदेश सरकार हर वर्ग को साथ लेकर चल रही है। गरीब परिवारों से किए वादे भी भूपेश सरकार ने पूरा किया है। गरीब परिवारों की भूख मिटाने के लिए सरकार हर महीने 1 रूपये की दर से 35 किलो चावल दे रही है। बिजली बिल आधा कर इस सरकार ने लोगों की जेब पर पड़ रहे भार को भी कम किया है। हर नागरिक को सर्वजन स्वास्थ्य योजना (यूनिवर्सल हेल्थकेयर) के अंतर्गत गुणवत्तायुक्त इलाज की सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध कराई। इसके लिए मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक, मिलाओं के लिए दाई-दीदी क्लीनिक, मोबाइल मेडिकल यूनिट्स का संचालन किया जा रहा है।

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शिक्षा पर दिया जोर

कांग्रेस ने चुनाव के समय शिक्षा स्तर में सुधार और गुणवत्ता पर जोर दिया था। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार ने स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी मीडियम स्कूल की शुरुआत की। जिससे हर वर्ग के बच्चों को शिक्षा मिले। कोई भी बच्चा ज्ञान से वंचित न हो। सरकार की इस योजना की चर्चा प्रदेश समेत देशभर में होने लगी। देशभर में इस योजना को सराहना मिली। अब सरकार जल्द ही इंग्लिश मीडियम की तर्ज पर हिंदी मीडियम स्कूलों का भी संचालन करने जा रही है।

आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल

आदिवासियों और वनाश्रितों को आर्थिक सहायता

आदिवासियों को उनका अधिकार देने में भी भूपेश सरकार प्रतिबद्ध है। यही वजह है कि वनाधिकार पट्टा देने का वादा जो कांग्रेस ने किया था, उसे छत्तीसगढ़िया सरकार ने अमलीजामा पहनाया। घोषणा पत्र में किए वादे के अलावा सरकार ने वनाश्रितों और लघु वनोपज संग्राहकों की आर्थिक सहायता की दिशा में भी काम किया। सरकार ने 7 वनोपज से बढ़ाकर 52 वन उत्पादों को खरीदी में शामिल करने के साथ ही इनका अच्छा मूल्य भी दिया। जिससे आदिवासियों की जेब में पैसा पहुंचा।

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युवाओं और महिलाओं को रोजगार की दिशा में की सराहनीय पहल

रोजगार घोषणा पत्र का अहम बिंदु रहा है। प्रदेश सरकार ने न सिर्फ रोजगार के नए रास्ते खोले बल्कि रोजगार उपलब्ध कराने में भी अग्रणी रहे। मनरेगा के तहत रोजगार देने में छत्तीसगढ़ देश भर में अपनी अलग पहचान बना चुका है। यहां तक की कोरोना जैसी विषम परिस्थिति में भी मनरेगा लोगों के लिए आय का स्त्रोत रहा है। इसके अलावा आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने में भी सरकार ने काफी हद तक कामयाबी पाई है।

मनरेगा से लोगों को मिला रोजगार

प्रकृति रक्षा में भी आगे रही भूपेश सरकार

विकास के साथ-साथ सरकार ने प्रकृति पर भी ध्यान दिया। जंगलों को संरक्षित और संवर्धित करने का काम भूपेश सरकार ने किया है। साथ ही पारंपरिक घटकों को भी बढ़ावा दिया। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरुवा, बाड़ी योजना ने नदी-नालों को संरक्षित किया। जिसका फायदा आज किसानों को मिल रहा है। इसके अलावा मवेशियों के संरक्षण की दिशा में गौठानों का निर्माण कराया साथ ही इसके जरिए महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार भी उपलब्ध कराया।

‘भूपेश है तो भरोसा है’

तीन वर्ष के कार्यकाल में भूपेश बघेल की सरकार ने लोगों के भरोसे पर खरा उतरने की भरपूर कोशिश की है। इसका परिणाम भी ‘भूपेश है तो भरोसा है’ जैसे नारे ने दिया है। आगे के कार्यकाल को लेकर भी भूपेश बघेल और उनकी टीम तैयार है।