• तीन साल में 13 हजार करोड़ के सड़क स्वीकृत, शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस

रायपुर। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार के तीन साल का कार्यकाल पूरा हो गया है। प्रदेश की सियासत और कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए चुनावी वादों में कितने पूरे हुए? आगामी दो वर्षों में सरकार किन योजनाओं को आगे बढ़ाने जा रही है? आखिर केंद्र सरकार से तकरार के बाद प्रदेश को कैसे मिल रहे हैं थोक में पुरस्कार, और तीन साल में सरकार ने कितना कार्य किया इन सब को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने तीन साल में जो काम किए वह भाजप के तीन कार्यकाल में किए गए काम पर भारी है। इन तमाम मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से विशेष चर्चा की गई।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बार प्रदेश सरकार की चुनौतियां कम नहीं हुई। मुख्यमंत्री बनने के बाद जनता से जो वादे किए हैं उन्हें पूरा करना है। उसी दिशा में काम कर रहे हैं। पहले साल ही पंचायती राज चुनाव समाप्त होने के बाद कोरोना आ गया। यह कठिन चुनौती का समय था। यातायात के साधन बंद रहे। लोगों को लॉकडाउन के समय समस्याओं का सामना करना पड़ा। आज केंद्र सरकार तरह-तरह की अड़ंगे लगा रही है, इसके कारण भी कठिनाई आ रही है। फिर भी राज्य सरकार ने 25 सौ रुपए में धान खरीदी, तेंदूपत्ता, सिंचाई कर माफी, बिजली बिल में 400 यूनिट तक छूट जैसे जनता से किए वादों को पूरा करने का प्रयास किया है।

हर वर्ग के लिए किया काम

हमारी नजर में विकास के दो पैमाने होते हैं। पहला सड़क, पुल-पुलिया ओर बिल्डिंग जैसे अधोसंरचना के काम और दूसरा राज्य के निवासियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना। हमारी प्राथमिकता में व्यक्ति का विकास रहा है। लोगों की स्वास्थ्य, शिक्षा के कामों पर हमारा फोकस है। कोरोनाकाल में पूरे देश में मंदी का असर रहा। इस दौर में भी राज्य सरकार ने किसान, मजदूर और अन्य वर्गों के लिए काम किया। इससे छत्तीसगढ़ पर मंदी का असर नहीं पड़ा। जो स्कूल उनके समय बंद थे, उसे हमने शुरू कराया। नए स्कूल और यूनिवसिटी खोले गए। भाजपा सरकार के तीन कार्यकाल में 4 मेडिकल कॉलेज खोले गए थे। हमारे तीन साल के कार्यकाल में चार मेडिकल कॉलेज कांकेर, महासमुंद, कांकेर ओर दुर्ग में प्रारंभ हुए। 13 हजार करोड़ के सड़कों का निर्माण स्वीकृत किया गया। निजी क्षेत्र के एक मेडिकल कॉलेज को सरकार ने अधिग्रहित किया। प्रदेश में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी स्कूल खोले गए। यहां 76 हजार बच्चे पढ़ रहे हैं। ये स्कूल निजी क्षेत्र के स्कूलों से प्रतियोगिता कर रहे हैं।

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केंद्र नहीं कर रहा सहयोग

उन्होंने कहा, छत्तीसगढ़ में जो सरप्लस पैडी है, उससे एथेनॉल बनाने केंद्र को हमने पत्र लिखा है। एथेनॉल बनाने से तीन लाभ होगा। पहला किसानों को दाम मिलेगा। दूसरा नई फैक्ट्रियां खुलेंगी तो रोजगार का सृजन होगा। तीसरा क्रुड ऑयल खरीदने में जो विदेशी मुद्रा खर्च किए जा रहे हैं, उसमें कमी आएगी। आज भी केंद्र से हमें अनुमति नहीं मिल रही है, जबकि हमने एथेनॉल बनाने के लिए 12 संस्थानों से एमओयू भी कर लिया है। केंद्र सरकार अनुमति देती है तो साल डेढ़ साल में उत्पादन शुरू हो जाएगा।

राज्य के काम को केंद्र ने सराहा

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य की कई योजनाओं को छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज 74 प्रतिशत है। वन विभाग को केंद्र से इसके लिए 11 राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार मिले हैं। छत्तीसगढ़ में स्वच्छता को अर्थ से कैसे जोड़ा जाए इस पर काम हुआ। गाय हमारे लिए नारा नहीं है, बल्कि इसका गोबर हम खरीद रहे हैं। गोबर सड़कों में नहीं दिखने से सफाई तो दिखाई दे रही है। हमने उसे आर्थिक बनाया अनार्थिक नहीं। सब कामों को अर्थव्यवस्था से जोड़ा इसलिए राज्य सरकार हर क्षेत्र में सफल रही।

मेरे कारण बढ़ा विपक्ष का कद

कांग्रेस पदाधिकारियों को विभिन्न राज्यों में संगठन और विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी दी जाती है, वैसे ही मुझे दी गई। यह मेरे लिए गर्व की बात है कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने मुझ पर भरोसा किया। दूसरी बात यह है कि भाजपा के नेताओं के लिए चाहे वह रमन सिंह जी हों या सरोज जी हों, उन्हें कम से कम मेरे कारण उनको पूछ तो रहे हैं। डॉ. रमन सिंह 15 साल के मुख्यमंत्री हैं, उनकी ऐसी स्थिति मुझसे देखी नहीं जाती। मुझे असम की जिम्मेदारी मिली तो रमन सिंह एक प्रेसवार्ता करने असम तक गए। सरोज जी को यूपी में पीएम के क्षेत्र वाराणसी की जिम्मेदारी दी गई है। छत्तीसगढ़ के विपक्ष के साथियों का कद बढ़ा है। यह देखकर अच्छा लगता है कि उनका कद मेरे कारण बढ़ा है।

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छत्तीसगढ़ मॉडल देश में चर्चित

गुजरात मॉडल मोदीजी की मॉडल है। उस मॉडल से अमीर और अमीर हो गए। गरीब और गरीब हो गए। छत्तीसगढ़ का मॉडल कांग्रेस का मॉडल है। इसे क्रियान्वित किया गया है। यह गांधी और कांग्रेस की परंपराओं पर आधारित है। न्याय योजना के तहत आदिवासियों, किसानों, मजदूरों और हर वर्ग के लिए हम न्याय चाहते हैं। राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के माध्यम से हम सभी वर्गों के न्याय के लिए काम कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के लोगों के जेब में इस मॉडल से पैसा पहुंच रहा है।