रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के भारतीय जनता पार्टी के सांसद लगातार छत्तीसगढ़िया हित के खिलाफ तथ्यहीन और तर्कहीन आरोप लगा रहे हैं। इसी क्रम में रेडी-टू-ईट को लेकर भी लोकसभा में भ्रम का माहौल पैदा करने का प्रयास किया गया। विदित हो कि 1994 में पीयूसीएल ने एक जनहित याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल किया था, जिस पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को डायरेक्शन दिया था और इसी के आधार पर 2013 में फूड प्रोसेसिंग बिल लाया गया।
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2013 के एक्ट के तहत देश के अलग-अलग राज्यों में कुपोषण को दूर करने के लिए रेडी-टू-ईट के तहत दिए जाने वाले खाद्य पदार्थों में प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की गुणवत्ता के साथ उपलब्धता सुनिश्चित करने मानक तय किए गए थे। 2019 में उन्हीं बिंदुओं को देशभर में लागू करवाने सर्वोच्च न्यायालय ने डायरेक्शन दिया था। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के परिपालन में देशभर के अलग-अलग राज्यों में हाइजीन प्रोटीन युक्त पैक्ड फूड की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया है। बिहार, तमिलनाडु सहित अनेकों राज्यों में यही व्यवस्था की जा रही है। उसी परिपेक्ष में छत्तीसगढ़ सरकार ने पहल करते हुए रेडी-टू-ईट के हितग्राहियों को दिए जाने वाले खाद्य मिश्रण में निर्धारित मात्रा में ऊर्जा, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, कैलोरी, प्रोटीन, फोलिक एसिड, राइबोफ्लेविन, नाइसीन, कैलशियम, थाईमीन, आयरन, विटामिन ए, विटामिन बी12, विटामिन सी, एवं विटामिन डी के साथ ही फोर्टीफाइड एवं फाइन मिक्स गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित कर हितग्राहियों को प्रदान करने का निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा हाइजीन प्रोटीन युक्त मानकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए पैक्ड फूड तैयार करना है, अतः यह जिम्मेदारी बीज निगम को दी जा रही है ताकि जिला स्तर पर गुणवत्ता मानक एक समान सुनिश्चित हो। पूर्व में जो ₹13 प्रति किलो डिसटीब्यूशन एवं अन्य का महिला स्व सहायता समूह को मिलता था उसे बढ़ाकर भूपेश बघेल सरकार ने ₹15 कर दिया है जिसका तात्पर्य यह है कि ना केवल हितग्राहियों को उच्च गुणवत्ता युक्त हाइजीन पैक्ड फूड मिलेगा बल्कि महिला स्व सहायता समूह को भी 13 के स्थान पर ₹15 प्रति किलो प्राप्त होगा।
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प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में 15 साल के भारतीय जनता पार्टी के कुशासन में छत्तीसगढ़ को केवल लूटने का काम रमन सरकार करती रही। कुपोषण में नंबर वन, गरीबी रेखा में नंबर वन राष्ट्रीय औसत से लगभग दुगुने, बेरोजगारी, मलेरिया से होने वाली मौत और नक्सलवाद ही छत्तीसगढ़ की पहचान बना दी गई थी। नान और धान के घोटाले अगस्ता और पनामा की कमीशन खोरी नागरिक सहकारी बैंक की लूट चिटफंड कंपनियों को सरंक्षण भाजपा के भ्रष्टाचार का जीता जागता प्रमाण है। भूपेश बघेल सरकार में तो स्थिति तेजी से सुधर रही है जनवरी 2019 की स्थिति में चिन्हांकित कुपोषित बच्चों की संख्या 4,33,541 थी इनमें से मई 2021 की स्थिति में लगभग एक तिहाई, 32 प्रतिशत यानी 1,40,556 बच्चे कुपोषण से मुक्त हो गए। गांधी जी की जयंती पर 2 अक्टूबर 2019 को मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान पूरे छत्तीसगढ़ में शुरू किया गया। प्रदेश के संवेदनशील मुखिया भूपेश बघेल के नेतृत्व में दो वर्ष के दौरान कुपोषण के आंकड़ों में 32 प्रतिशत सुधार का दूसरा उदाहरण छत्तीसगढ़ के अलावा दुनिया में और कहीं नहीं है। दरअसल छत्तीसगढ़ में गांव, गरीब, किसान, आदिवासी, युवा और महिलाओं के कल्याण के लिए भूपेश बघेल सरकार के लगातार प्रयासों से आमजन में बढ़ती लोकप्रियता से भाजपाई मुद्दाविहीन हो गए हैं और अनर्गल, तथ्यहीन और तर्कहीन आरोप लगाकर मीडिया में बने रहना चाहते हैं। मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के चलते बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से ध्यान भटकाने छत्तीसगढ़ के भाजपा सांसद सुप्रीम कोर्ट के डायरेक्शन और हाईकोर्ट में लंबित प्रकरण पर भी अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।
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