रायपुर। छत्तीसगढ़ में गरीब मजदूरों के रोजगार के लिए मनरेगा ‘मील का पत्थर’ साबित हुआ है। इससे न सिर्फ लोगों को रेजगार मिला है बल्कि मनरेगा के तहत लोगों को काम देने में छत्तीसगढ़ ने सभी राज्यों को पछाड़ते हुए एक नया रिकॉर्ड भी बनाया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना बेरोजगार ग्रामीणों के जीवन में बदलाव लेकर आई। खासकर उन प्रवासी मजदूरों के लिए जो कोरोना काल जैसी भयंकर विपदा से निपटने के बाद अपने गृह राज्य लौटे।

स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने में मनरेगा सबसे कारगर रहा है। बीते 36 महीनों में कोरिया जैसे जिले में मनरेगा के तहत अलग-अलग ग्राम पंचायतों के 1 लाख से ज्यादा मनरेगा कार्डधारकों को रोजगार मिला है। वर्तमान में कोरिया जिले में 1 लाख 92 हजार 969 एक्टिव वर्कर्स पंजीकृत हैं। पिछले 3 सालों में कोरिया जिले में 19 हजार 642 निर्माणकार्य कराए गए हैं। इसमें मनरेगा मजदूरों को वेतन के तौर पर 281 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है।

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कोरोना काल में संबल बना मनरेगा

वित्तीय वर्ष 2021-22 में मनरेगा के 100 दिनों के रोजगार के तहत 2 हजार 525 मजदूर परिवारों को बतौर वेतन 66.46 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। नवंबर तक 32.94 लाख मानव रोजगार दिवस सृजित किए गए हैं। कोरोन काल के दौरान जब लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ रहा था तब मनरेगा के तहत मिले रोजगार ने ऐसे लोगों को संभाला है। योजना के तहत पंचायत भवन, नहर सुधार, आंगनबाड़ी केंद्र भवन निर्माण, धान संग्रहण के लिए चबूतरा निर्माण जैसे कई कार्य किए गए हैं।

मनरेगा योजना

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

जिले को निर्माणकार्यों के रूप में कई स्थाई संपत्ति मिली है। जो क्षेत्र के विकास को गति देने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का काम करेंगे।