राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि आज युवा सशक्तिकरण के सामने कई गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। मोबाइल की लत, ड्रग्स का बढ़ता प्रभाव, बेरोजगारी और सामाजिक अपराध जैसी समस्याएं युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं। इन परिस्थितियों से निपटने के लिए राज्य सरकार व्यापक और दीर्घकालिक रणनीति तैयार कर रही है।
रोजगार आधारित समाधान पर जोर
उन्होंने कहा कि युवा सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे युवाओं की संख्या बढ़ रही है जो कृषि से जुड़ना नहीं चाहते, लेकिन उनके लिए वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध नहीं हैं। सरकार का लक्ष्य ऐसे युवाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसरों से जोड़ना है।
कौशल प्रशिक्षण से खुलेगी नई राह
सरकार युवा सशक्तिकरण के लिए विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रही है। प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल कार्य, मोबाइल रिपेयरिंग, गार्डनिंग और कारपेंट्री जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर युवाओं को रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
उद्योगों की भागीदारी से बढ़ेगा रोजगार
उपाध्यक्ष ने कहा कि युवा सशक्तिकरण को गति देने के लिए उद्योगों और निजी संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक जिले में विशेष रोजगार आयोजन किए जाएंगे जहां प्रशिक्षित युवाओं को सीधे नौकरी के अवसर प्रदान किए जाएंगे। यह मॉडल युवाओं को प्रशिक्षण से रोजगार तक की पूरी प्रक्रिया में सहायता करेगा।
आत्मनिर्भर युवाओं से मजबूत होगा राज्य
उन्होंने कहा कि युवा सशक्तिकरण केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का भी माध्यम है। यदि युवा आर्थिक रूप से मजबूत होंगे तो सामाजिक समस्याओं में कमी आएगी और राज्य के विकास को नई गति मिलेगी। यही लक्ष्य सरकार की आगामी कार्ययोजना का आधार बनेगा।
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