- गौठान मेप एप का होगा लोकार्पण
रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज दोपहर 12 बजे अपने निवास कार्यालय में आयोजित गोधन न्याय योजना के राशि अंतरण कार्यक्रम में पशुपालक ग्रामीणों, गौठानों से जुड़ी महिला समूहों और गौठान समितियों को 3 करोड़ 93 लाख रुपये की राशि ऑनलाइन जारी करेंगे। जिसमें एक दिसंबर से 15 दिसंबर तक राज्य के गौठानों में पशुपालक ग्रामीणों, किसानों, भूमिहीनों से गोधन न्याय योजना के तहत खरीदे गए गोबर के एवज में 2 करोड़ 63 लाख रुपये भुगतान और गौठान समितियों को 79 लाख और महिला समूहों को 51 लाख रुपये की लाभांश राशि शामिल हैं।
इसके अलावा सीएम गौठान मेप एप का भी शुभारंभ करेंगे। इस ऐप के जरिए गौठान में संचालित सारी गतिविधियों जैसे गोबर खरीदी भुगतान, गौठान से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की आय मूलक गतिविधियों के तहत उत्पादित सामग्री, दर और विक्रय की अद्यतन जानकारी मिल सकेगी।
58 लाख क्विंटल से ज्यादा गोबर की खरीदी
बता दें कि गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों में ग्रामीणों से 2 रुपये की दर से गोबर खरीदा जा रहा है। राज्य में इस योजना की शुरूआत 20 जुलाई 2020 को हरेली पर्व से हुई थी। 20 जुलाई 2020 से लेकर 15 दिसंबर 2021 तक की स्थिति में 58.32 लाख क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है। जिसके एवज में गोबर बेचने वालों को अब तक 114 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है। गौठानों में गोबर से महिला स्व-सहायता समूह बड़े पैमाने पर वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट प्लस और अन्य उत्पाद तैयार कर रही हैं।
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गौठान में तैयार हो रहे कई उत्पाद
गौठानों में महिला समूह अब तक 9 लाख 69 हजार क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट और 4 लाख 21 हजार क्विंटल से ज्यादा सुपर कम्पोस्ट खाद बना चुकी है। जिसे सोसायटियों के जरिए शासन के विभिन्न विभागों और किसानों को रियायती दर पर प्रदाय किया जा रहा है। महिला समूह गोबर से खाद के अलावा गो-काष्ठ, दीया, अगरबत्ती, मूर्तियां एवं अन्य सामग्री बनाकर बेच चुके हैं। गौठानों में महिला समूहों द्वारा इसके अलावा सब्जी और मशरूम का उत्पादन, मुर्गी, बकरी, मछली पालन और पशुपालन के साथ-साथ अन्य आय मूलक विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। जिससे महिला समूहों को अब तक 48 करोड़ 20 लाख रुपये कमा चुके हैं।
कई गौठान हो चुके हैं स्वावलंबी
राज्य में गोधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए गांवों में गौठानों का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। गौठानों में पशुधन देख-रेख, इलाज और चारा-पानी का निःशुल्क प्रबंध है। राज्य में अब तक 10584 गांवों में गौठानों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिसमें से 7836 गौठान निर्मित एवं संचालित हैं। जिसमें से 2029 गौठान आज की स्थिति में स्वावलंबी हो चुके हैं।
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