रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में वनौषधियों से जुड़े उद्योगों की स्थापना के लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी। इसके लिए कच्चा माल, जमीन, श्रम और जरूरी अधोसंरचनाएं सरकार प्राथमिकता से मुहैया कराएगी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इंडियन फॉर्मासिस्ट एसोशिएशन, छत्तीसगढ़ द्वारा राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रेक्षागृह में विश्व फॉर्मासिस्ट दिवस के मौके पर आयोजित कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में वनौषधियां प्रचुर मात्रा में मौजूद है। यहां का 44 प्रतिशत भू-भाग वन क्षेत्र है, जहां विभिन्न प्रकार की वनौषधियां बहुतायत में मिलती हैं। उन्होंने फॉर्मासिस्टों को आह्वान करते हुए कहा कि वे यहां दवा और वनौषधि से संबंधित उद्योगों की स्थापना के लिए आगे आएं। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव तथा राज्यसभा सांसद छाया वर्मा और फूलोदेवी नेताम भी इस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुईं।

दवा निर्माताओं का छत्तीसगढ़ में स्वागत

मुख्यमंत्री बघेल ने मुख्य अतिथि के रूप में कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया के सभी दवा निर्माताओं का छत्तीसगढ़ में स्वागत है। यहां दवा उद्योग स्थापित करने के इच्छुक व्यक्ति या समूह राज्य के हों या राज्य के बाहर के हों, सरकार उन्हें सभी आवश्यक संसाधन, सुविधाएं और छूट प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्थापित होने वाले वनौषधि इकाईयों को लघु वनोपज संघ द्वारा निर्धारित दरों पर ही कच्चा माल उपलब्ध कराया जाएगा। स्थानीय स्तर पर उत्पादित दवाईयों को आयुष एवं स्वास्थ्य विभाग बिना किसी निविदा के सीधे खरीद सकता है।

मुख्यमंत्री ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि जेनेरिक दवाईयों को लोकप्रिय बनाने में फॉर्मासिस्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जेनेरिक दवाओं का उपयोग बढ़ाकर कम खर्चे में लोगों को इलाज उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने प्रदेश में कोरोना संक्रमण के नियंत्रण एवं रोकथाम में फॉर्मासिस्टों के साथ ही डॉक्टरों, नर्सों, टैक्नीशियनों, ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक व स्वयंसेवी संगठनों तथा शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों के योगदान की खुले दिल से तारीफ की। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के कठिन दौर में समाज के सभी वर्गों का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। पूरा प्रदेश एकजुट होकर कोरोना से लड़ा और इस पर विजय पाई।