मंच पर जीवंत हो उठी पौराणिक कथाएं
रायपुर। राजधानी में चल रहे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव 2021 के तीसरे दिन झारखंड के जनजातीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत छाऊ नृत्य ने लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के दौरान दर्शकों को पूरी तरह से बांधे रखा। छाऊ नृत्य के दौरान पंडाल में मौजूद लोग मंच पर कलाकारों के नृत्य करतब और उनके पद चपलता को टकटकी लगाए देखते रहे। छाऊ नृत्य दल के कलाकारों की साज-सज्जा उनके परिधान, मुखौटे लोगों के लिए आकर्षण बने रहे। प्रदर्शन को देखर लग रहा था कि मानों कलाकरों की शानदार प्रस्तुति से रामायण, महाभारत काल से लेकर पौराणिक काल की कथाएं मंच पर जीवंत हो गई हों। जिसे दर्शकों ने खूब सराहा और कार्यक्रम की प्रस्तुति के दौरान तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।


छाऊ नृत्य भारतवर्ष के तीन पूर्वी राज्यों में लोक और जनजातीय कलाकारों द्वारा किया जाने वाला एक लोकप्रिय नृत्यरूप है। जिसमें मार्शल आर्ट और करतबों की भरमार रहती है। छाऊ नृत्य इन तीन राज्यों के संबंधित क्षेत्रों के आधार पर तीन नामों से जाना जाता है। पश्चिम बंगाल में पुरुलिया छाऊ, झारखंड में सराइकेला छाऊ, और ओडिशा में मयूरभंज छाऊ, के नाम से इसे जाना जाता है। इसमें से पहले दो प्रकार के छाऊ नृत्यों में प्रस्तुति के अवसर पर मुखौटों का उपयोग किया जाता है। जबकि तीसरे प्रकार में मुखौटे का प्रयोग नहीं होता।
मुद्राओं और भाव-भंगिमाओं के लिए प्रसिद्ध
छाऊ नृत्य में रामायण महाभारत और पुराण की कथाओं को कलाकार दर्शकों के सामने नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। छाऊ अपनी ओजस्विता और शक्ति की परिपूर्णता के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। जिसमें नर्तकों द्वारा मार्शल आर्ट्स का बखूबी इस्तेमाल करते हुए अपने शरीर में विविध तरह की मुद्राओं और भाव-भंगिमाओं से दर्शकों को सम्मोहित करने में सफल रहता है। छाऊ नृत्य केवल पुरुष कलाकारों द्वारा ही किया जाता है।
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