रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज अपने निवास कार्यालय में गोधन न्याय योजना की राशि के अंतरण कार्यक्रम में रायपुर जिले के आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह में छत्तीसगढ़ के प्रथम मखाना प्रसंस्करण केन्द्र ‘मखाना खेती, प्रसंस्करण एवं विपणन केंद्र‘ का वर्चुअल शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने लिंगाडीह के ओजस फार्म में मखाने की खेती प्रारंभ करने वाले स्वर्गीय कृष्ण कुमार चंद्राकर दाऊ जी के नाम पर इस फार्म में उत्पादित मखाना की ‘दाऊजी‘ ब्रांड नाम से लांचिंग की।
कार्यक्रम में कृषि मंत्री रविंद्र चौबे, राज्यसभा सांसद छाया वर्मा, राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू और जनसंपर्क आयुक्त दीपांशु काबरा, ग्राम लिंगाडीह के ‘मखाना खेती, प्रसंस्करण एवं विपणन केंद्र‘ के गजेन्द्र चंद्राकर और मखाने की खेती कर रहे ओजस फार्म की मनीषा चंद्राकर भी उपस्थित थीं।


केंद्र में दी जाती है मुफ्त तकनीकि जानकारी
गजेन्द्र चंद्राकर ने इस अवसर पर मखाने की खेती पर प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि लिंगाडीह के ‘मखाना खेती, प्रसंस्करण एवं विपणन केंद्र‘ द्वारा किसानों को मखाना खेती के लिए मुफ्त तकनीकी जानकारी, मखाना प्रक्षेत्र का समय-समय पर भ्रमण कराया जाता है और खेती का प्रशिक्षण दी जाती है।
1 एकड़ में 70 हजार तक का मुनाफा
गजेन्द्र ने बताया कि केंद्र किसानों के लिए मखाना बीज की उपलब्धता के साथ-साथ मखाने की खरीदी भी करता है। उन्होंने बताया कि तालाब के साथ-साथ एक से डेढ़ फीट गहरे खेत में मखाने की खेती की जा सकती है। उन्होंने ये भी बताया कि मखाने की खेती से प्रति एकड़ लगभग 70 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया जा सकता है। चंद्राकर ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय कृष्ण कुमार चंद्राकर दाऊ जी ने मखाने की खेती प्रारंभ की थी।
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