जांजगीर-चांपा। जांजगीर की सक्ती रियासत के 5वें राजा कुंवर धर्मेंद्र सिंह के राज्यभिषेक पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। रानी गीता राणा सिंह ने उन्हें बेटा मानने से इनकार करते हुए राज्यभिषेक पर आपत्ति जताई थी। इसे लेकर कोर्ट में याचिका भी दायर की गई। जिस पर प्रथम सत्र अपर न्यायाधीश गीता निवारे ने सुनवाई करते हुए अगले आदेश तक यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं।

दरअसल, महामाया मंदिर में मंगलवार को राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह कुंवर धर्मेंद्र का राज्यभिषेक करने वाले थे। उन्होंने पहले ही अपने उत्तराधिकारी की घोषणा कर दी थी। राज्यभिषेक को लेकर सारी तैयारियां भी शुरू हो गई थी। छह दशक बाद ऐसा मौका फिर आया था, जब सक्ती की जनता एक बार फिर राज्याभिषेक की साक्षी बनती। लेकिन अब कोर्ट ने इस राज्यभिषेक पर न्यायालय ने रोक लगा दी है।

राजा सुरेंद्र बहादुर के दत्तक पुत्र

कुंवर धर्मेंद्र का जन्म 1 मई 1992 को हुआ था। राजा सुरेंद्र बहादुर की भी कोई संतान नहीं होने के कारण उन्होंने धर्मेंद्र को अपना दत्तक पुत्र बनाया था। कुंवर धर्मेंद्र ने राजकुमार कॉलेज रायपुर से नर्सरी से 12वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद वह आगे की पढ़ाई करने के लिए दिल्ली चले गए। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए ऑनर्स और एलएलबी की पढ़ाई की। दिल्ली हाईकोर्ट में उन्होंने प्रैक्टिस भी की है।

रानी ने दिया विज्ञापन, न बनें राज्याभिषेक के साक्षी

रानी गीता राणा सिंह ने समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर राज्याभिषेक में लोगों से नहीं शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि मेरे पति राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह ने महल में काम करने वाले नौकर स्व. धनेश्वर गोड़ के पुत्र धर्मेंद्र सिंह को छल से गैरकानूनी तरीके से दत्तक पुत्र के रूप में प्रचारित कर रहे हैं। जबकि हम धर्मेंद्र सिंह को आज भी अपना पुत्र नहीं मानते हैं। धर्मेंद्र सिंह का परिवार आज भी महल में बतौर नौकर काम कर रहा है। हम दंपती का दत्तक धर्मेंद्र वारिस नहीं है।

रानी का आरोप

धर्मेंद्र गोड़ आपराधिक प्रवृत्ति का है। उसके खिलाफ स्थानीय थाने और दूसरे थानों में कई मामले दर्ज हैं और कुछ लंबित भी पड़े हैं। इसलिए इस लोकतांत्रितक प्रणाली में इस राज्याभिषेक के विवाद पूर्ण कार्यक्रम के साक्षी न बनें।