- राजधानी रायपुर में दो दिवसीय धर्म संसद का शुभारंभ
रायपुर। राजधानी रायपुर में पहली बार धर्म संसद शुरु हुई। दो दिवसीय आयोजन के पहले दिन शुक्रवार को देश भर के साधु-संत जुटे हैं। रायपुर के रावणभाठा मैदान में धर्म संसद में साधु संतों ने सनातन धर्म की रक्षा पर चर्चा की। आयोजक श्री नीलकंठ सेवा संस्थान छत्तीसगढ़ और हिंदू समाज संगठन के सहयोग से किया जा रहा है।
श्री नीलकंठ सेवा संस्थान के संस्थापक पं. नीलकंठ त्रिपाठी ने बताया कि सनातन धर्मियों को एकत्रित करने के लिए संत समाज चर्चा कर रहे हैं। इसके लिए संत महात्मा सनातन धर्म के लिए दिशा-निर्देश, सनातन धर्मियों के मार्गदर्शक बनेंगे। इस आयोजन में प्रदेश भर के करीब 50 हजार से अधिक लोग एकत्रित होने की संभावना जताई जा रही है। काय्रक्रम के प्रमुख संरक्षक दूधाधारी मठ के महंत और गोसेवा आयोग के अध्यक्ष महंत डा. रामसुंदर दास महाराज, शदाणी दरबार के संत डा. युधिष्ठिर लाल महाराज, शंकराचार्य आश्रम देवपुरी के प्रभारी स्वामी डा. इंदुभावनंद महाराज समेत अन्य लोग हैं।
निकली शोभायात्रा
धर्म संसद में छत्तीसगढ़ के अलावा दिल्ली और अयोध्या से भी संत शामिल होने पहुंचे हैं। सभी सनातन संस्कृति और हिंदू धर्म को लेकर अपनी बात इस धर्म संसद में रखेंगे। शनिवार को शोभायात्रा के साथ धर्म संसद शुरू हुआ। दूधाधारी मठ से एक कलश यात्रा रावणभाटा मैदान तक पहुंची। यात्रा में शामिल होने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, विधायक विकास उपाध्याय और रायपुर नगर निगम के सभापति प्रमोद दुबे भी शामिल थे। रावण भाटा मैदान में धर्म ध्वजा को रखकर सभी संतो ने पूजा-अर्चना की।
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हिंदू और सनातन धर्म की देंगे जानकारी
इसी के साथ धर्म संसद की शुरुआत हुई। रविवार तक चलने वाली इस धर्म संसद में यूपी से भी बड़ी तादाद में संत पहुंचे हुए हैं। दूधाधारी मठ के प्रमुख महंत रामसुंदर दास ने कहा कि धर्म संसद लोगों को हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति के बारे में जानकारी देने के लिए आयोजित की गई है। हम चाहते हैं कि लोग न सिर्फ इसे समझें बल्कि अपने आचरण में भी शामिल करें। यह भारत राष्ट्र और समाज के लिए भी बेहद जरूरी है। संतों का व्याख्यान समय सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक। पुन: संतों का व्याख्यान और सम्मान समारोह दोपहर तीन से शाम पांच बजे तक। कार्यक्रम में आए संतों ने मंच से अपनी बात रखते हुए कहा कि महाभारत में भीष्म पितामह भी यह चाहते थे कि जीत अर्जुन की हो। मगर उन्हें साथ दुर्योधन का देना पड़ा। आज हम भी उसी प्रकार से कंफ्यूज हैं। हमें पता है कि सही क्या है मगर हम गलत की ओर आकर्षित हैं। जरूरी है सनातन धर्म को समझते हुए इसके अपने रोजमर्रा के जीवन में लागू करने की ।
यूपी, महाराष्ट्र सहित देश के कई संत पहुंचे
धर्म संसद में बाघम्बरी मठ लेटे हुए हनुमान मंदिर, प्रयागराज से महंत बलवीर गिरी महाराज, काली पुत्र महाराष्ट्र से संत काली चरण महाराज, सुश्री साध्वी रंजना, बैजनाथ धाम के महामंडलेश्वर श्री प्रकाशचंद महाराज, महंत हनुमानगद्दी अयोध्या से रामदास महाराज, दिगम्बर अनी अखाड़ा चित्रकुट धाम से महंत श्री दिव्य जीवनदास महाराज, नागा साधु काशी के राष्ट्रीय महासचिव महंत राहुल गिरी महाराज, चित्रकूट धाम से महंत भरतदास महाराज, वृंदावन से आचार्य सूरज महाराज,वृंदावन से आचार्य राम गोपाल महाराज,अयोध्या से जगत गुरु श्रीधराचार्य, ग्वालियर हरिद्वार से महामंडलेश्वर राजगुरू संतोषानंद एकादश रूद्रपीठ आए हैं।
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