बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में बाघों की घटती संख्या को लेकर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। पिछले 4 साल में बाघों की संख्या महज 19 तक रह गई है। लेकिन वन विभाग ने अब तक इस मामले में संज्ञान नहीं लिया है। ना ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। इस मामले को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, राज्य शासन के वन विभाग के सचिव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
रायपुर के एक समाजसेवी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने बताया है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने साल 2013 में कुछ गाइडलाइंस जारी की थी। जिसके तहत रैपिड रिस्पांस टीम का गठन किया जाना था। तब सभी वनमंडलों को बजट जारी कर विशेष बंदूक, दवाइयां आदि खरीदने के आदेश दिए गए थे। इसके तहत सामग्रियों की खरीदी भी की गई थी। लेकिन, अचानकमार टाइगर रिजर्व और उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में रैपिड रिस्पांस टीम अस्तित्व में ही नहीं है।
आज तक नहीं हुई बैठक
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में इसका गठन 2020 में किया गया है। समाजसेवी ने याचिका में बताया है कि बाघों को संरक्षण देने के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में 2006 में नए प्रावधान जोड़े गए हैं। जिसके तहत अलग-अलग स्तर पर तीन प्रकार की वैधानिक समितियां गठित कर बाघों और अन्य वन्यजीवों को संरक्षित करना है। छत्तीसगढ़ में इन समितियों का गठन तो किया गया है, लेकिन गठन होने के बाद से अब तक
एक भी बैठक नहीं हुई है।
46 से घटकर 19 पहुंची बाघों की संख्या
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि छत्तीसगढ़ में लगातार बाघों की संख्या कम हो रही है और शिकार हो रहा है। साल 2014 में 46 बाघ थे जो 2018 में घटकर 19 हो गए गए हैं। इसके बाद भी इनके संरक्षण की दिशा में कोई काम नहीं हो रहा है।
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