चंदखुरी के कौशल्या माता मंदिर में 3 दिनों का बड़ा आयोजन होने जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल नवरात्रि के पहले दिन यानी 7 अक्टूबर को राम मंदिर परिसर के विकास परियोजना के तहत मंदिर के जीर्णोद्धार एवं मंदिर के सौंदर्यीकरण कार्यों का लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में तय हुआ कि 7 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक कौशल्या माता मंदिर परिसर में प्रवचन और भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने राम कथा के लिए ख्याति प्राप्त प्रवचन कर्ता और भजन गायकों को आमंत्रित करने को कहा है। इस आयोजन की व्यवस्था पर्यटन विभाग को करनी है। आयोजन के दौरान दिन में स्थानीय मानस मंडलियों की प्रस्तुति होगी, वहीं शाम को प्रवचन और भजन संध्या का आयोजन किया जाना है।

भगवान श्रीराम की 51 फीट ऊंची प्रतिमा
पर्यटन विभाग के मुताबिक कौशल्या माता मंदिर के जीर्णोद्धार एवं परिसर के सौंदर्यीकरण के पहले और दूसरे चरण का काम पूरा हो चुका है। मंदिर के तालाब को फूलों से सजा कर सुंदर बनाया गया है। टापू पर बनने वाले नए मंदिर तक जाने के लिए नया पुल बनाया गया है। मंदिर के सामने भक्तों के लिए व्यवस्था की गई है। जहां से माता कौशल्या का दर्शन व पूजन कर सकते हैं। पर्यटन सचिव ने बताया कि मंदिर के प्रवेश द्वार पर विशाल गेट बनाया गया है। यहां पर भगवान श्रीराम की 51 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। मंदिर परिसर में लैंड स्केपिंग भी की गई है।

माता कौशल्या का इकलौता मंदिर

रायपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित चंदखुरी को प्राचीन कोशल की राजधानी माना जाता है। यहां भगवान राम की माता कौशल्या का एक प्राचीन मंदिर है। इसमें भगवान राम माता कौशल्या की गोद में बैठे दिखाए गए हैं। मान्यता है कि इस मंदिर को 8वीं शताब्दी में सोमवंशी राजाओं ने बनवाया था। उन्हें भी यह प्रतिमा तालाब में मिली थी। 1973 में मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ। अब इसको फिर नए सिरे से संवारा जा रहा है।

माता कौशल्या का इकलौता मंदिर

रायपुर से करीब 20 किमी दूर स्थित चंदखुरी को प्राचीन कोशल की राजधानी माना जाता है। यहां भगवान राम की माता कौशल्या का एक प्राचीन मंदिर है। इसमें भगवान राम माता कौशल्या की गोद में बैठे हैं। मान्यता है कि इस मंदिर को 8वीं शताब्दी में सोमवंशी राजाओं ने बनवाया था। उन्हें भी यह प्रतिमा तालाब में मिली थी। 1973 में मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ। अब इसको फिर नए सिरे से संवारा जा रहा है।