रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज सशस्त्र सेना झण्डा दिवस के अवसर पर सैनिकों के त्याग, समर्पण और बलिदान को नमन किया है। बघेल ने अपने संदेश में कहा है कि सशस्त्र सेना झंडा दिवस हमारे देश के महान सेनानियों और उनके परिवारजनों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को महसूस करने और उसमें अपना योगदान जोड़ने की पावन भावना का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि झंडा दिवस के अवसर पर प्रतीक स्वरूप जारी किए गए झंडे के माध्यम से हम सम्मानपूर्वक दान की परंपरा से जुड़ते हैं, क्योंकि इससे एकत्र होने वाली धनराशि हमारे जांबाज सैनिकों, पूर्व सैनिकों तथा शहीद परिवारों के कल्याण में अपना योगदान जोड़ती है। इसके माध्यम से हम शौर्य और त्याग की पावन भावना से भी जुड़ते हैं, जो हमारे पराक्रमी साथियों और उनके परिवारजनों को यह दृढ़ विश्वास प्रदान करती है कि हर परिस्थिति में हम सब देशवासी उनके साथ हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि ’सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष’ में उदारतापूर्वक दान देकर, सैनिक परिवारों के प्रति आदर और अपनी एकजुटता प्रदर्शित करें।
कब बनाया जाता है सशस्त्र सेना झंडा दिवस
सशस्त्र सेना झंडा दिवस या झंडा दिवस भारतीय सशस्त्र बलों के कर्मियों के कल्याण हेतु भारत की जनता से धन-संग्रह के प्रति समर्पित एक दिन है। यह 1949 से 7 दिसम्बर को भारत में प्रतिवर्ष मनाया जाता है।
सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर हुए धन संग्रह के तीन मुख्य उद्देश्य है- 1 . युद्ध के समय हुई जनहानि में सहयोग, 2 . सेना में कार्यरत कर्मियों और उनके परिवार के कल्याण और सहयोग हेतु, 3 . सेवानिवृत्त कर्मियों और उनके परिवार के कल्याण हेतु। इस दिवस पर धन-संग्रह सशस्त्र सेना के प्रतीक चिन्ह झंडे को बाँट कर किया जाता है। इस झंडे में तीन रंग (लाल, गहरा नीला और हल्का नीला) तीनों सेनाओं को प्रदर्शित करते है।
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