केंद्र ने 450 की दी थी मंजूरी, राज्य ने बढ़ाया क्षेत्र
सरकार जल्द जारी करेगी अधिसूचना

रायपुर। छत्तीसगढ़ में लेमरू हाथी रिजर्व को लेकर अब ये साफ हो गया है कि इसका दायरा 1995 वर्ग किलोमीटर होगा। राज्य सरकार ने यह निर्णय लेने के साथ ही इस संबंध में अधिसूचना प्रकाशित करने की तैयारी कर ली है। सरकार के राजपत्र में यह प्रकाशन जल्द होने की संभावना है। इससे पहले लंबे समय से यह सवाल पेचीदा बना हुआ था कि लेमरु हाथी रिजर्व का दायरा कितना होगा। यही नहीं, इस पूरे मामले को लेकर गहरे सियासी दांव भी चले जा रहे थे।

लेमरू हाथी रिजर्व के संबंध में राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित करने के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा आदेश जारी किया गया है। अधिसूचना में यह उल्लेख होगा कि जंगली हाथियों को उपयुक्त रहवास उपलब्ध कराने, मानव-हाथी द्वंद कम करने तथा बेहतर वन्य प्राणी प्रबंधन के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लेमरू हाथी रिजर्व घोषित किया जा रहा है। इसका क्षेत्रफल 1995.48 वर्ग किलोमीटर रखा गया है। बताया गया है कि कोल ब्लॉक और हाथियों वाले हसदेव अरण्य को इससे बाहर रखा है। केंद्र सरकार 450 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लिए सहमति दी थी, लेकिन राज्य सरकार व्यापक जनहित का हवाला देकर क्षेत्रफल बढ़ा रही है।

कई बार बदला क्षेत्रफल और दायरा

राज्य में कांग्रेस नेतृत्व की सरकार बनने के बाद अगस्त 2019 में 1995.48 वर्ग किमी का लेमरू हाथी रिजर्व बनाने का प्रस्ताव पारित किया था। बाद में हसदेव और चरनोई नदियों के कैचमेंट को भी इसमें शामिल कर इसे 3 हजार 827 वर्ग किमी करने पर सहमति बनाई। मई में वन विभाग ने लेमरू का क्षेत्रफल 1995.48 वर्म किमी की बजाय इसे 450 वर्ग किमी तक सीमित करने की कवायद की। वन विभाग के इस प्रस्ताव का खूब विरोध हुआ और विपक्ष ने भी सवाल उठाए थे।

कई कांग्रेस विधायकों ने भी उठाए थे सवाल

लेमरु हाथी रिजर्व को लेकर चली सियासत के बीच कुछ महीना पहले राज्य के कई कांग्रेस विधायकों ने हाथी रिजर्व के दायरे को लेकर पत्र जारी किए थे। पत्रों में जनहित का हवाला देते हुए मांग की गई थी। हाथी रिजर्व का क्षेत्रफल 450 वर्ग किलोमीटर तक सीमित हो। इस मामले को लेकर सियासत गरमाई थी। राज्य सरकार ने तय किया कि किसी हाल में भी बदलाव नहीं किया जाएगा। लेमरु 1995 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में ही बनेगा।

ग्रामीणों ने भी दायरा कम करने की बात कही थी

हाथी रिजर्व के क्षेत्रफल को लेकर चली सियासत के बीच कांग्रेस विधायकों ने दायरा कम रखने की जो बात उठाई थी, उसी समय स्थानीय स्तर से भी इसी मांग को तेज करने का प्रयास किया गया था। इस संबंध में कुछ अलग तर्क किए गए थे। स्थानीय ग्राम पंचायतों ने भी हाथी रिजर्व का क्षेत्र सीमित रखने का अनुरोध किया था। उनको आशंका है कि इससे उनकी आजीविका बाधित होगी और गतिविधियां सीमित हो जाएंगी।