26 सितंबर 2021 को पंडो परिवार के 22 घरों को तोड़ने के आरोपों में नया मोड़ सामने आ गया है। पंडो जनजाति के लोगों से अभद्रता, मारपीट और घरों को तोड़ने के आरोप गलत साबित हुए हैं। पंडो जनजाति के प्रांतीय अध्यक्ष उदय कुमार पंडो ने मौके का मुआयना किया। इतना ही नहीं, मौके से उनका एक वीडियो संदेश भी आया है। पंडो जनजाति के कई लोगों और ग्रामीण के सामने सभी आरोपों को गलत बताया गया है। घरों को तोड़ने को लेकर कहा गया है कि यहां गाय-बकरी रखने के लिए मजबूरी में झोपड़े बनाए गए थे।
उदय कुमार पंडो ने कहा कि जहां-जहां झोपड़े थे, घर थे, उन्हें समझ में आया है कि यह वास्तव में वो घर इनके (जनजाति के लोग) द्वारा बनाया हुआ नहीं था। न ही वो किसी व्यक्ति के रहने के लिए बनाया गया था। बल्कि वो घर केवल गाय, बैल और बकरी बांधने के लिए बनाया था। निस्तार के लिए जगह नहीं रहने के कारण अपने (पाही) झोपड़ी में रखने के लिए बनाय गया था।

अवैध रूप से अतिक्रमण की जो शिकायत मिली थी, उसके बाद वन विभाग, पंडो जनजाति के लोग और ग्रामीण सभी मौके पर पहुंचे थे। पंडो समाज के लोग यहां प्लास्टिक का छाया हुआ झोपड़ी बनाकर गायों को बांधने के लिए बनाए थे। अतिक्रमण कर जंगल में अवैध रूप से कब्जा किया गया था। जिसे सभी ने मिलकर हटाया है। उदय कुमार ने बताया कि जितने झोपड़ी वाले हैं, जितने घर वाले हैं उनका यह पाही (झोपड़ी) है। यहां गाय बैलों को मजबूरी में रखा जाता है। क्योंकि घर दूर है। फसलों को नुकसान न हो इसलिए गाय बैलो के लिये इसे बनाया गया था।

सारे आरोप निराधार

प्रांतीय अध्यक्ष का कहना है कि ग्रामीणों से जानकारी लेने के बाद, लोगों से पूछताछ के बाद ये सामने आया है कि मारपीट और अभद्रता के जो आरोप लगाए गए हैं, ऐसा कुछ भी नहीं है। प्रदेश और केंद्र लेवल पर गलत मैसेज भेजा गया है। जो कि सही नहीं है। सभी आरोप निराधार हैं।
वन विभाग का बयान
वहीं मामले को वन विभाग का कहना है कि 26 सितंबर 2021 को एक समाचार पत्र में ‘मुर्गा, बकरे नहीं दिए तो अफसरों ने तुड़वा दिए पंडो परिवार के 22 घर’ शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी। प्रकाशित खबर में पंडो जनजाति समुदाय के लोगों से अभद्रता और मारपीट का उल्लेख किया गया था। जो कि निराधार है।

ग्रामीणों से मिली थी अतिक्रमण की शिकायत

संयुक्त वन मण्डलाधिकारी से मिले प्रतिवेदन के मुताबिक बीट गार्ड विरेंद्रनगर को ग्रामीणों के द्वारा अवैध अतिक्रमण की शिकायत मिली थी। जिसके बाद वन परिक्षेत्र अधिकरी ने 19 वनकर्मियों के दल को अतिक्रमण रोकने और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए भेजा था। टीम के साथ-साथ विरेंद्रनगर गांव के 30 से 35 लोग मौजूद थे। संरक्षित वन के भीतर विकासखंड वाड्रफनगर के बैकुंठपुर निवासी रामजन्म यादव के द्वारा कच्चे दीवार से बने एक कमरे को खपरे से छाकर अवैध अतिक्रमण किया गया था।

20 लोगों ने किया था कब्जा

जानकारी के मुताबिक बैकुंठपुर के बालेश्वर के साथ ही अन्य 20 लोगों ने अवैध अतिक्रमण के उद्देश्य से बल्ली और खूंटे से झाला बनाया था। ऊपर से प्लास्टिक की पन्नी लगाई गई थी। जिसके बाद वन अमले ने विरेंद्रनगर के लोगों के सामने अतिक्रमण हटाने को कहा था। आपसी समझौते से अतिक्रमण हटा भी लिया गया।

कोई अभद्रता या दुर्व्यवहरा नहीं हुआ

बताया जा रहा है कि अतिक्रमण एक महीना पुराना है। शिकायत के आधार पर वन अपराध प्रकरण क्रमांक 16854 व 16855 जारी किया गया था। जिस संबंध में वन परिक्षेत्र अधिकरी वाड्रफनगर के निर्देशन में अवैध अतिक्रमण हटाने का प्रयास किया गया। अतिक्रमण हटाए जाने के दौरान किसी भी तरह की अभद्रता, गाली-गलौज मारपीट नहीं की गई। अतिक्रमण हटाने के दौरान पर्याप्त संख्या में पुरुष और महिला वनकर्मी भी मौजूद थे।

तथ्यों के आधार पर आरोप निराधार

कार्रवाई के बाद रामजन्म यादव ने भोले-भाले पंडो जाति के लोगों को बरगलाकर अनावश्यक आरोप लगाए। ताकि अन्य लोगों के द्वारा अतिक्रमण किया जा सके। प्रकरण की समीक्षा में दो प्रमुख तथ्य सामने आए हैं जिसमें संरक्षित वन कक्ष क्रमांक पी0 836 एवं पी0 840 के अतिक्रमण स्थल का जीपीएस कोऑडिनेट लेकर वर्षवार मिलान किया गया। इसमें साल 2004, 2012 और 2017 के मैप में कही भी उक्त कक्षों में अतिक्रमण और कब्जा दिखाई नहीं दे रहा है। जिससे ये स्पष्ट हो जाता है कि उक्त दोनों कक्षों में किया गया अतिक्रमण नया है। साथ ही जांच में एक अन्य तथ्य सामने आए हैं, जिसमें कि उक्त अतिक्रमणकारियों का बैकुण्ठपुर में खुद का भवन है। वे अतिक्रमित वनभूमि पर जीविकोपार्जन के लिए आश्रित नहीं हैं।