छत्तीसगढ़ में बनी छत्तीसगढ़ी फिल्मों पर 33 और दूसरी भाषाओं की फिल्म पर 25 प्रतिशत सब्सिडी

नवा रायपुर में 150 से 200 एकड़ जमीन पर फिल्म सिटी बनाने की तैयारी

छत्तीसगढ़ फिल्म नीति-2021 के फिल्म नीति का प्रमुख उद्देश्य छत्तीसगढ़ राज्य को फिल्म अनुकूल राज्य बनाने और फिल्म शूटिंग के लिए सेंट्रल हब के रूप में विकसित करना है। स्थानीय प्रतिभाओं के लिए रोजगार के अवसर का विकास करना भी इसका मुख्य उद्देश्य है। इस नई नीति का मकसद फिल्म निर्माण के क्षेत्र में राज्य में निवेशकों को प्रोत्साहित करना तथा प्रदेश के प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्थलों को फिल्मों के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाना है। छत्तीसगढ़ की यह फिल्म नीति के लिए पांच राज्यों तेलंगाना, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश,

ओडिशा और झारखंड की फिल्म नीति का अध्ययन

इस नीति से छत्तीसगढ़ी कला-संस्कृति और पर्यटन को देश-दुनिया में नई पहचान मिलेगी। फिल्म नीति बनने से छत्तीसगढ़ में सिनेमा उद्योग से जुड़े लोगों को इससे फायदा होगा। छत्तीसगढ़ में बनी छत्तीसगढ़ी फिल्मों पर सरकार 33 प्रतिशत सब्सिडी देगी। दूसरी भाषाओं की फिल्म भी यहां के लोकेशन पर बनती है तो 25 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। फिल्म नीति में सिनेमा हॉल संस्कृति को बढ़ावा देने की भी कोशिश है। सिंगल स्क्रीन और मल्टी स्क्रीन किसी भी तरह के सिनेमा हॉल खोलने पर सरकार मदद देगी। धारावाहिक निर्माण पर 50 लाख रुपए तक की सब्सिडी मिलेगी। वहीं, वेब प्लेटफॉर्म के लिए बन रही किसी फिल्म की 75 प्रतिशत से अधिक शूटिंग छत्तीसगढ़ में हुई तो सरकार एक करोड़ रुपए की सहायता करेगी। फिल्म निर्माण में प्रदेश के कलाकारों और तकनीशियनों को मौका देने पर 25 लाख रुपए की सहायता भी मिलेगी।

फिल्म सिटी का भी प्रस्ताव

नई फिल्म नीति में फिल्म सिटी बनाने का भी प्रस्ताव है। इसे नवा रायपुर में 150 से 200 एकड़ जमीन पर बनाने की तैयारी है। संस्कृति विभाग के अफसर हैदराबाद जाकर ऐसी कई सुविधाओं का भ्रमण कर आए हैं। उसी के आधार पर इसे विकसित किया जाएगा। बताया जा रहा है कि सरकार जल्दी ही फिल्म सिटी के लिए जगह का निर्धारण कर लेगी। इसमें शूटिंग के लिए स्टूडियो से लेकर मिक्सिंग-डबिंग और एडिटिंग आदि की सुविधाएं भी दी जाएंगी।

राष्ट्रीय अवार्ड पर मिलेगा प्रोत्साहन अनुदान

छत्तीसगढ़ में निर्मित राष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त फिल्म को प्रोत्साहन अनुदान दिया जाएगा। इसके तहत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय नई दिल्ली से प्राइम कैटेगरी में राष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ी पृष्ठभूमि के सर्वोत्तम फिल्म, सर्वोत्तम निदेशक, सर्वोत्तम अभिनेता, सर्वोत्तम अभिनेत्री, राष्ट्रीय एकता अथवा सामाजिक संदेश आदि मापदण्ड के लिए अधिकतम एक करोड़ रूपए की राशि किसी भी एक कैटेगरी में तथा वर्ष में एक बार अतिरिक्त अनुदान का प्रावधान किया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वर्ष 2021 में घोषित 67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के अंतर्गत ‘भूलन द मेज’ को क्षेत्रीय भाषा छत्तीसगढ़ी की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया है। वर्ष 2021 के लिए एक करोड़ रूपए प्रोत्साहन अनुदान की पात्रता होगी।

सिनेमा हॉल खोलने पर मिलेगी मदद

फिल्म नीति के तहत प्रदेश में सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल खोलने वालों को 15 लाख रुपए तक की मदद मिलेगी। मल्टीप्लेक्स के लिए सहायता राशि 50 लाख रुपए तक होगी। किसी बंद पड़े सिनेमाहॉल को मरम्मत और रिनोवेशन के लिए भी सरकार 10 लाख रुपए तक देगी।

सिनेमा के तकनीकी पक्ष पर भी जोर

फिल्म नीति में सिनेमा निर्माण के तकनीकी पक्ष पर भी जोर है। स्थानीय फिल्म उद्योग को मदद पहुंचाने के लिए सरकार ने फिल्म निर्माण के उपकरणों की खरीदी में भी मदद का हाथ बढ़ाया है। कहा गया है, फिल्म निर्माण संबंधी उपकरणों की खरीदी पर सरकार 15 प्रतिशत सब्सिडी देगी।

ऑस्कर जीतने वाली फिल्म को पांच करोड़ मिलेंगे

सरकार ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाली छत्तीसगढ़ी फिल्मों को बड़े प्रोत्साहन अनुदान की घोषणा की है। संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने बताया, ऑस्कर जैसा अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली छत्तीसगढ़ी फिल्म, निर्देशक, अभिनेता-अभिनेत्री को पांच करोड़ रुपए का प्रोत्साहन अनुदान मिलेगा। सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से आयोजित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की प्राइम श्रेणियों में पुरस्कृतों को एक करोड़ रुपए दिए जाएंगे। सरकार ने 2021 के लिए पहला पुरस्कार मनोज वर्मा की फिल्म “भूलन द मेज’ को प्रदान करने की घोषणा की है। छत्तीसगढ़ी और हिंदी में बनी यह फिल्म संजीव बख्शी के उपन्यास भूलन कांदा पर आधारित है।