रायपुर। रायपुर में धर्म संसद का आयोजन हो रहा है। जिसमें दिल्ली, अयोध्या, हरिद्वार समेत देश के विभिन्न प्रांतो से संत, महात्मा, धर्माचार्य और पुरोहित पहुंचे हैं। रायपुर में आयोजित धर्म संसद में हिंदू संस्कृति और सनातन धर्म के प्रचार की बातें हो रही हैं। संत-महात्माओं का मानना है कि वर्तमान समय में समाज को सनातन संस्कृति से जोड़ा जाना बहुत आवश्यक है।
दिल्ली से पहुंची साध्वी विभानंद गिरी ने कहा कि देश के मठ-मंदिरों की सुरक्षा, लव जिहाद खत्म करने, बढ़ते धर्मांतरण के मामलों के प्रति लोगों को जागरूक करने, हिंदू संस्कृति का महत्व बताने के लिए धर्म संसद का आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि धर्म संसद आज की व्यवस्था नहीं है। 1800 के दशक में स्वामी विवेकानंद विश्व धर्म संसद में शामिल हुए थे।
आरक्षण अब खत्म होना चाहिए- साध्वी
उन्होंने कहा कि देश से आरक्षण की व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाना चाहिए। आज के समय में सामान्य वर्ग का गरीब व्यक्ति शिक्षा और रोजगार हासिल नहीं कर पा रहा है। जबकि दूसरे वर्ग के लोग आरक्षण की वजह से संपन्न होने के बाद भी रोजगार और शिक्षा पा रहे हैं।
दूसरे धर्म में विवाह पर रोक लगाना प्रयास
साध्वी ने कहा कि मां-बाप एक युवतियों को पालते-पोसते हैं, पढ़ा लिखा कर बड़ा करते हैं, फिर 18 साल की उम्र में बालिग होने के बाद वह दूसरे धर्म के युवकों के बहकावे में आकर, समाज और परिवार के सम्मान को ताक पर रखकर घर से भाग जाती है। इसके बाद वहां हत्या, गैंगरेप जैसी घटनाओं और प्रताड़ना का शिकार होती है। इन लव जिहाद की घटनाओं पर रोक लगे यही हमारा प्रयास है।
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पंडितों को भी मिलना चाहिए मानदेय
साध्वी विभा ने कहा कि मस्जिदों में हाफिज को तनख्वाह दी जाती है। हम चाहते हैं कि मंदिरों मठों में भी पुजारियों के लिए यह व्यवस्था की जाए। मंदिरों को तोड़े जाने से बचाया जाए उनका संरक्षण किया जाए। आज के समय में सरकारी पैसे से हज की सुविधा दी जाती है, क्या हिंदुओं को तीर्थ की सुविधा नहीं दी जानी चाहिए?
सभी वर्गों के लिए हों एक व्यवस्था
साध्वी ने आगे कहा कि आज के समय में सरकारें आंख मूंदकर बैठी हैं। देश में एक जैसी व्यवस्था हो जो सभी वर्ग, जाति, संप्रदाय के लोगों पर लागू की जानी चाहिए। आबादी कम करने का जिम्मा सिर्फ हिंदुओं का नहीं है। देश में कानून होना चाहिए और इसे समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश का राजा ऐसा हो जिसके अंदर सभी लोगों के लिए समान भाव हो। ऐसा करने पर ही देश प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा।
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