रायपुर। घर की चारदीवारी और मजदूरी करने तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज मनरेगा में महिला मेट के रूप में काम कर अपना जीवन संवार रही हैं। नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड की दुब्बाटोटा ग्राम पंचायत की आदिवासी महिला मेट गंगोत्री पुनेम भी अपने गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने में लगी हुई हैं। मनरेगा के साथ ही सरकार की दूसरी योजनाओं के जरिए वह महिलाओं की आमदनी बढ़ा रही है।
दुब्बाटोटा में मनरेगा मजदूरी का भुगतान पहले नगद होता था, लेकिन गंगोत्री की कोशिशों से अब श्रमिकों के बैंक खातों में इसका भुगतान हो रहा है। गांव से 6 किलोमीटर दूर ग्रामीण बैंक की दोरनापाल शाखा में पिछले साल तक 300 मनरेगा श्रमिकों का बचत खाता था। गंगोत्री ने इस साल 66 और श्रमिकों का वहां खाता खुलवा दिया है। श्रमिकों की मजदूरी अब सीधे उनके खातों में आ रही है।
मनरेगा कार्यों से महिलाओं को मिला रोज़गार
मनरेगा कार्यों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में गंगोत्री की बड़ी भूमिका है। गांव की चार अन्य महिला मेट के साथ घर-घर जाकर महिलाओं से बात की और उन्हें महिला मेट के सुपरविजन में काम करने के लिए प्रेरित किया। उन लोगों का यह प्रयास रंग लाया। उनकी लगातार कोशिशों से इस साल गांव की 480 महिला श्रमिकों को 23 हजार 272 मानव दिवस का रोजगार मिल चुका है। महिला मेट की उपस्थिति से आदिवासी क्षेत्रों की महिलाएं कार्यस्थल पर सहजता महसूस कर रही हैं।
महिलाओं की आर्थिक स्थिति हुई मजबूत
गंगोत्री एक साल पहले तक खेती में पति का हाथ बटाकर और मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं। वह गांव में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एन.आर.एल.एम.) के अंतर्गत गठित सीता स्व-सहायता समूह से जुड़ी और आजीविकामूलक गतिविधियों में सक्रिय हुईं। उन्होंने अन्य महिलाओं को भी इसके लिए प्रेरित किया। बारहवीं तक शिक्षित गंगोत्री शुरूआत से ही अपने समूह में ‘बुक-कीपर’ की जिम्मेदारी उठा रही है। उसका समूह मुर्गीपालन और अंडा उत्पादन के काम में लगा हुआ है। इससे हो रही आमदनी से समूह की महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
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